दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। साल 2020 के दंगों में आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है। कोर्ट ने 13 जुलाई को ही इन्हें हत्या और आपराधिक साजिश समेत गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया था।
सजा सुनाते वक्त अदालत ने कहा कि यह घटना बेहद गंभीर थी। इसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया। घटना का जो ब्योरा सामने आया, उसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया। दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उम्रकैद का फैसला सुनाया।
दोषियों में ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद और अनस शामिल हैं। इन सभी को आईपीसी की धारा 302, 120बी, 147, 148 और 149 के तहत दोषी ठहराया गया था। सजा के साथ ही दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक का निपटारा हो गया।
यह मामला फरवरी 2020 का है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर तनाव बढ़ा था। 24 फरवरी को हिंसा भड़की। पथराव, आगजनी और फायरिंग हुई। 25 फरवरी को 26 साल के अंकित शर्मा घर से सामान लेने निकले थे। फिर नहीं लौटे। उसी दिन चांदबाग में ताहिर हुसैन के मकान की छत से पत्थरबाजी और पेट्रोल बम फेंके जाने के आरोप लगे।
अगले दिन 26 फरवरी को खजूरी खास के नाले से अंकित का शव मिला। पोस्टमार्टम में धारदार हथियार के कई घाव निकले। पिता रविंद्र कुमार ने ताहिर हुसैन और दूसरे लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 27 फरवरी को जांच एसआईटी को सौंपी गई। फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए।
मार्च 2020 में ताहिर हुसैन की गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने दावा किया कि उनके मकान की छत से बड़ी तादाद में पत्थर, पेट्रोल बम बनाने का सामान, एसिड के पैकेट, गुलेल और दूसरी चीजें मिलीं। जांच एजेंसी के मुताबिक दंगों के दौरान इस मकान का इस्तेमाल गतिविधियों के केंद्र के तौर पर हुआ।
जून 2020 में चार्जशीट दाखिल हुई। पुलिस ने आरोप लगाया कि अंकित शर्मा को भीड़ ने सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया। हत्या के बाद शव नाले में फेंक दिया गया। 2021 से 2022 तक गवाहों और सबूतों की जांच चली। फॉरेंसिक रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश हुए।
23 मार्च 2023 को 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय हुए। कोर्ट ने कहा मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं। 2023 से 2025 तक लंबी सुनवाई चली। अभियोजन ने पुलिस अफसरों, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष ने सभी आरोप खारिज किए।
13 जुलाई 2026 को कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत पांच को दोषी माना। 31 जुलाई को सजा का ऐलान हुआ। पिता रविंद्र कुमार की शिकायत ही मामले का आधार बनी। उन्होंने कहा था कि ताहिर के मकान से लगातार पत्थरबाजी, पेट्रोल बम और फायरिंग हो रही थी। इसी हिंसा में बेटे की जान गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने गवाही में कहा कि ताहिर हुसैन मौके पर मौजूद थे और भीड़ की गतिविधियों में शामिल थे। फॉरेंसिक जांच में छत से पत्थर, पेट्रोल बम का सामान, एसिड और गुलेल मिलने का दावा किया गया। अभियोजन ने इसे पहले से की गई तैयारी बताया।
डिजिटल साक्ष्य भी पेश हुए। कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को कथित साजिश और मौजूदगी से जोड़ा गया। चार्जशीट में कहा गया कि अंकित शर्मा को सुनियोजित साजिश के तहत मारा गया। ताहिर हुसैन को इस साजिश का प्रमुख आरोपी बताया गया।
आज फैसले के बाद अंकित शर्मा के परिवार को थोड़ी राहत मिली होगी। छह साल लंबी चली इस कानूनी लड़ाई में आखिरकार इंसाफ का फैसला आया। दिल्ली दंगों के जख्म भले न भरें, लेकिन इस मामले ने एक मिसाल कायम की है।
