होर्मुज में सुसाइड ड्रोन बोट युद्ध: अमेरिका ने घदीर पनडुब्बी नष्ट करने का किया पहला हमला, ईरान की ताकत कितनी बची?

राहुल शर्मा
4 Min Read
Rate this post

होर्मुज जलडमरूमध्य में सुसाइड ड्रोन बोट युद्ध ने नया मोड़ ले लिया है। अमेरिका ने पहली बार अपने कॉरसेयर मानवरहित नौकाओं से हमला कर ईरान की घदीर श्रेणी की पनडुब्बी को नष्ट कर दिया। यह घटना 13 जुलाई 2026 की है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ड्रोन बोट्स ने बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर हमला किया।

सेंटकॉम के मुताबिक 12 जुलाई को कई लक्ष्यों पर हमले किए गए। तीन कॉरसेयर ड्रोन बोट्स ने बंदर अब्बास बंदरगाह पर घदीर क्लास पनडुब्बी को निशाना बनाया। अमेरिकी सैन्य इतिहास में यह पहला मौका है जब मानवरहित सतही पोतों को आक्रामक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इससे पहले जून में एक कॉरसेयर यूएसवी ने ओमान की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त अपाचे हेलीकॉप्टर के चालक दल को बचाया था।

होर्मुज में सुसाइड ड्रोन बोट युद्ध की शुरुआत वास्तव में ईरान और हूती विद्रोहियों ने की थी। लेकिन अब अमेरिका ने इस तकनीक को उन्नत रूप में अपना लिया है। यूक्रेन-रूस युद्ध में भी मानवरहित नौकाओं ने रूसी बेड़े को भारी नुकसान पहुंचाया था। सारोनिक कॉरसेयर की सफलता पूरे यूएसवी उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

अमेरिका की नौसेना क्षमता दुनिया में सबसे ज्यादा है। उसके पास 11 विमानवाहक पोत, 70 से ज्यादा परमाणु पनडुब्बियां और 90 से अधिक विध्वंसक व फ्रिगेट हैं। पांचवां बेड़ा बहरीन में तैनात है। 2026 के युद्ध में टास्क फोर्स 59 के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। रैंड कॉर्पोरेशन और सीएसआईएस की रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका होर्मुज में लगातार 20-30 युद्धपोत और सैकड़ों ड्रोन तैनात कर सकता है।

ईरान की नौसेना दो हिस्सों में बंटी है – नियमित नौसेना और आईआरजीसी नेवी। आईआरजीसी असममित युद्ध में माहिर है। ईरान के पास 20-25 घदीर और फतेह क्लास की छोटी पनडुब्बियां, सैकड़ों स्पीड बोट्स, बारूदी सुरंगें और क्रूज मिसाइलें हैं। लेकिन आधुनिक युद्धपोतों की भारी कमी है। 2026 के युद्ध में ईरान ने कई जहाजों पर हमले किए मगर अमेरिकी हमलों में उसकी कई सुविधाएं नष्ट हो चुकी हैं।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के 2026 के आंकड़ों के मुताबिक ईरान की नौसेना पहले से ही पुरानी पड़ चुकी है और युद्ध में और कमजोर हुई है। ईरान के पास अभी भी कुछ ताकत बची है – बारूदी सुरंगें, ड्रोन और स्पीड बोट स्वार्म हमले। लेकिन अमेरिका की हवाई श्रेष्ठता और ड्रोन तकनीक के आगे ईरान की पारंपरिक नौसेना काफी कमजोर पड़ गई है।

सीएसआईएस की रिपोर्ट के अनुसार बड़े युद्ध में ईरान होर्मुज को कुछ दिनों के लिए बाधित कर सकता है लेकिन लंबे समय तक नियंत्रण नहीं रख पाएगा। ट्रंप ने होर्मुज को ‘गार्जियन ऑफ द स्ट्रेट’ कहकर अमेरिका का नियंत्रण घोषित किया और 20% टोल लेने की बात कही। उन्होंने नौसैनिक नाकाबंदी भी दोबारा लगा दी।

समुद्री युद्ध में ईरान की ताकत काफी कम हो चुकी है। अमेरिका नई ड्रोन तकनीक से आगे निकल गया है। होर्मुज पर अमेरिका का प्रभावी नियंत्रण है लेकिन पूर्ण शांति तभी आएगी जब दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आएंगे।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *