नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026. संसद का मॉनसून सत्र हंगामे के साथ समाप्त हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्र खत्म होने के बाद अपने चैंबर में फ्लोर लीडर्स के लिए पारंपरिक चाय पार्टी रखी। सत्तापक्ष से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह पहुंचे। विपक्ष की ओर से सिर्फ डीएमके की सांसद कनिमोझी ही चाय पार्टी में शामिल हुईं। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया।
चाय पार्टी में मोदी-शाह संग कनिमोझी की मौजूदगी को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। विपक्ष ने स्पीकर की चाय पार्टी का बहिष्कार लगातार दूसरी बार किया। पिछले साल भी विपक्ष ने इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन तब डीएमके भी बहिष्कार में शामिल थी। इस बार डीएमके ने अपनी अलग राह अपनाते हुए कनिमोझी को भेजा, जिससे पार्टी के नए समीकरणों की चर्चा है।
कनिमोझी के शामिल होने से डीएमके के सत्ता पक्ष के करीब आने के संकेत मिल रहे हैं। मोदी सरकार के लिए परिसीमन विधेयक पास कराना अब easier हो सकता है, क्योंकि डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। डीएमके के विरोध के कारण ही पिछले महीने विशेष सत्र में यह विधेयक पास नहीं हो पाया था। कनिमोझी के कदम से यह संदेश भी गया है कि डीएमके विपक्ष से दूरी बना रही है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद से डीएमके सत्ता से बाहर है और कांग्रेस के साथ उसके रिश्ते भी ठंडे चल रहे हैं। डीएमके ने हाल ही में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की थी। लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी में कनिमोझी के शामिल होने से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि डीएमके जल्द ही सरकार के साथ मिलकर काम कर सकती है।
मोदी सरकार का दावा है कि एनडीए को अगर दो तिहाई बहुमत चाहिए, तो डीएमके का समर्थन जरूरी है। मौजूदा संख्या के हिसाब से सरकार को 28 और सांसदों की जरूरत है। डीएमके के 22 सांसदों को सीधे या परोक्ष रूप से जोड़कर सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल जैसे अहम मुद्दों को आसानी से पारित कर सकती है।
लोकसभा के इतिहास में यह पहला मौका है जब विपक्षी दल की ओर से सिर्फ एक ही सांसद ने स्पीकर की चाय पार्टी में हिस्सा लिया। इस घटना से विपक्ष की एकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। मोदी-शाह चाय पार्टी में विपक्ष की गैरमौजूदगी और कनिमोझी के शामिल होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी साफ हो रहा है कि मोदी सरकार की नीतियों और विपक्ष की रणनीति के बीच अब नए समीकरण बन रहे हैं। आने वाले समय में क्या डीएमके सरकार के साथ मिलकर काम करेगी या विपक्षी खेमे का हिस्सा बनेगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, मोदी-शाह चाय पार्टी की इस मुलाकात ने राजनीतिक माहौल में नई ऊर्जा भर दी है।
