धर्मेंद्रसिंह जडेजा ने घरेलू क्रिकेट में 600 से अधिक विकेट लिए हैं, लेकिन अब तक उन्हें भारतीय टीम में जगह नहीं मिली है। 36 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर ने सौराष्ट्र की ओर से लंबे समय तक लगातार प्रदर्शन किया है। फर्स्ट क्लास मैचों में उनके नाम 423 विकेट दर्ज हैं, जबकि रणजी ट्रॉफी में पिछले कई सत्रों से वह सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने हुए हैं। इस बीच टीम इंडिया में रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव जैसे स्पिनरों की मौजूदगी ने प्रतिस्पर्धा को और कठिन बना दिया है।
जडेजा की उपलब्धियों में फर्स्ट क्लास cricket में 26.25 की औसत से 423 विकेट, 26 बार पारी में पांच या अधिक विकेट और सात बार एक मैच में दस या अधिक विकेट शामिल हैं। लिस्ट-ए में उन्होंने 90 मैचों में 121 विकेट लिए हैं और टी20 में 73 मैचों में 65 विकेट अपने नाम किए हैं। बल्ले से भी उन्होंने फर्स्ट क्लास में 2123 रन बनाए, जिसमें सात अर्धशतक रहे, जबकि लिस्ट-ए और टी20 में क्रमशः 566 और 208 रन जोड़े हैं।
पिछले कुछ वर्षों से उनका प्रदर्शन निरंतर रहा है, खासकर रणजी ट्रॉफी में 2017‑18 सीजन से अब तक 293 विकेट लेना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के साथ उनका लंबा zwiąक अब समाप्त हो रहा है, क्योंकि उन्होंने एसोसिएशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त कर लिया है। आगामी घरेलू सीजन में वह छत्तीसगढ़ की टीम के लिए खेलते नजर आ सकते हैं।
जडेजा का नाम अक्सर रवींद्र जडेजा से जोड़कर देखा जाता है, हालांकि दोनों के बीच कोई पारिवारिक संबंध नहीं है। दोनों ही सौराष्ट्र से आते हैं और बाएं हाथ के स्पिनर हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर केवल रवींद्र जडेजा ने अपनी पहचान बनाई है। धर्मेंद्रसिंह जडेजा के घरेलू रिकॉर्ड को देखते हुए कई विशेषज्ञ मानते हैं कि उनका टैलेंट नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अब सवाल यह है कि 600 से अधिक विकेट और लंबे समय तकsteady प्रदर्शन के बावजूद क्या टीम इंडिया के चयनकर्ता कभी उन्हें मौका देंगे? इस प्रश्न का उत्तर भविष्य के चयन प्रक्रिया में ही स्पष्ट होगा। तब तक उनके fans आशा रखते हैं कि जल्द ही राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने का मौका मिलेगा।
