भारत की अर्थव्यवस्था के सफ़र पर आए विवाद के बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने एक तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग GDP वृद्धि के प्रति सवाल उठाए हैं, उन्हें समझने में वाकई अल्पज्ञान है। भारत की आख़िरी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे बहस को मिश्रा ने ‘गलत दावों’ कहा।
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कांग्रेस ने सरकार की ओर से GDP आंकड़ों की गणना के तरीके पर सवाल उठाए हैं। गर्ग का तर्क है कि नई सीरीज़ में बदलाव के कारण आंकड़े पिछली तिमाहियों से अलग दिख रहे हैं। उन्होंने जून 2025 की तिमाही में 6 लाख करोड़ रुपये की कमी का आरोप लगाया।
नीलकंठ मिश्रा ने इस विवाद को खारिज करते हुए कहा कि पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना सही नहीं है। उन्होंने बताया कि नई सीरीज़ में आंकड़े जुटाने का तरीका अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों को समझने में मददगार है। उन्होंने कार और SUV की बिक्री में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी, दोपहिया वाहनों में 20 प्रतिशत वृद्धि के आंकड़े सामने रखे।
उन्होंने निर्यात में 9 प्रतिशत की वृद्धि, बैंक लेंडिंग में सुधार और कर लिया जाने की दर में वृद्धि को भी उल्लेख किया। नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि ये सभी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने में मदद करते हैं।
वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़, GDP केवल एक मापदण्ड नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्ज, निवेश और निर्माण क्षेत्र के संकेतक भी मजबूत हैं। उन्होंने पहुँचाया कि आम लोगों की जेब में बचत और कमाई में वृद्धि का संकेत वाहन बिक्री और टैक्स कलेक्शन में दिख रहा है।
तर्क है कि सरकार नई GDP सीरीज़ के माध्यम से अर्थव्यवस्था की स्थिति को सरासर मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही है। लेकिन मिश्रा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वास्तव में अर्थव्यवस्था में कोई गड़बड़ी नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार निजी क्षेत्र के निवेश के आधार पर सरकार का आरोप सही नहीं है।
अगले समय में भारत की GDP वृद्धि 7.5 प्रतिशत तक पहुँच सकती है, यानि यदि सरकार की नीतियां स्थिर रहें। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, महंगाई के दबाव के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था केवल स्लैक के कारण अपनी पूरी क्षमता से चल नहीं पा रही है।
नीलकंठ मिश्रा ने चेतावनी भी दी कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव फिर बढ़ सकता है। इसी कारण से लेबर मार्केट को मजबूत करने के लिए लगातार उच्च वृद्धि की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति और नीति स्थिरता के साथ, भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ पाएगी।
