IAS अधिकारी दिव्या मित्तल राजनीति में नया प्रवेश कर रही हैं और उन्होंने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी।
उन्होंने 30 अगस्त 2026 को 13 साल की सेवा के बाद आईएएस से इस्तीफा दिया था जो 15 सितंबर से प्रभावी हुआ।
दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की और पहले लंदन में नौकरी करने के बाद भारत लौटकर UPSC की तैयारी की थी।
उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति आम लोगों के मुद्दों और उनकी आवाज को सामने लाने के लिए होगी।
उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि वे यहां से ही नई राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी।
अपने प्रशासनिक कार्यकाल में उन्होंने मिर्जापुर में एक महिला की समस्या का जिक्र किया जो चाहती थी कि गांव में स्कूल की अगली कक्षा शुरू हो।
उन्होंने बताया कि स्कूल को मंजूरी मिली लेकिन तीन साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ और इस पर उन्होंने इरादे की कमी बताई।
दिव्या मित्तल ने सरकारी जमीन के पट्टे और दस्तावेजों में गड़बड़ी की एक घटना का भी जिक्र किया और कहा कि अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल और गड्ढों की समस्या को उठाया और कहा कि इस पर जवाबदेही की आवश्यकता है।
युवाओं और शिक्षा पर बात करते हुए उन्होंने पेपर लीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरे को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि उनके पास चुनावी राजनीति के लिए बड़ा आर्थिक संसाधन नहीं है और वे जाति-धर्म के समीकरण पर आधारित राजनीति करने में विश्वास नहीं रखतीं।
अपने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों का भी उन्होंने जिक्र किया और कहा कि वे डरने वाली नहीं हैं।
अंत में, उन्होंने कहा कि राजनीति में बदलाव लाना हैगा ताकि लोगों की समस्याएं सुनी जाएं और जनता को मतदाता के रूप में न देखा जाए।
