केंद्र सरकार ने बुधवार को निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। पेंशन कटौती के लिए अनिवार्य सैलरी लिमिट 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। इससे कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी का लाभ मिलेगा।
इस EPFO पेंशन नया नियम के तहत अब 51 लाख कर्मचारियों के लिए पेंशन कटौती अनिवार्य हो जाएगी। सरकार को इसके लिए अनुमानित 11,339 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ेगा। यह नियम आज 17 सितंबर 2026 से लागू हो गया है।
पेंशन के लिए कंट्रीब्यूशन कर्मचारी की सैलरी से नहीं, बल्कि नियोक्ता के योगदान से जाएगा। नियोक्ता 8.33 फीसदी पेंशन में योगदान देगा और बाकी पीएफ अकाउंट में जमा करेगा। ऐसे में बिना इन हैंड सैलरी कटे, कर्मचारियों को पेंशन कटौती का लाभ मिलेगा।
अब यदि आपकी बेसिक और डीए मिलाकर सैलरी 25,000 रुपये की कैटेगरी में आती है, तो रिटायरमेंट के बाद पेंशन कितनी बनेगी, इसके लिए EPS के तहत एक फार्मूला दिया गया है। मासिक पेंशन = पेंशन योग्य सैलरी × पेंशन योग्य सेवा के साल ÷ 70। 20 साल या उससे अधिक की सेवा पर 2 साल का अतिरिक्त सर्विस वेटेज भी मिलता है।
अगर आप 25 साल के हैं और आपकी बेसिक और डीए मिलाकर 25,000 रुपये है, तो आपके पेंशन योग्य साल 33 साल होंगे। इसपर 2 साल का बोनस भी दिया जाएगा। ऐसे में अनुमानित पेंशन 12,500 रुपये प्रति महीना होगी। इसी तरह, अगर आपकी उम्र 30 साल है और आपकी बेसिक और डीए 25,000 रुपये है, तो पेंशन योग्य सर्विस 28 साल होगी। इसपर 2 साल का बोनस भी दिया जाएगा। ऐसे में अनुमानित पेंशन 10,714 रुपये प्रति महीना होगी।
यह तभी संभव है जब 25000 रुपये आपकी पेंशन योग्य सैलरी रहे। वास्तविक EPS गणना में अंतिम अवधि की पेंशन योग्य सैलरी और सेवा अवधि देखी जाती है। अगर ये दोनों इस सीनारियो में फिट बैठते हैं तो आपकी पेंशन ऊपर बताए गए कैलकुलेशन के आधार पर मिलेगी।
