दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ DUSU के 2026 विजेता दीपांशु शौकीन ने ABVP और NSUI को हराकर इतिहास बनाया। इस जीत ने विश्वविद्यालय की राजनीति में एक नया मोड़ सेट कर दिया है।
दीपांशु शौकीन ने 13,705 वोटों के अंतर से DUSU चुनाव में जीत हासिल की। उनके विजय ने 72 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
इस जीत के पीछे चार मुख्य कारण हैं। पहला कारण चार साल की मेहनत है। दीपांशु ने अपने कॉलेज की हर एक्टिविटी और गेम्स में लगातार सहभागिता की। उन्होंने NSUI से जुड़कर काम किया, लेकिन 2019 के बाद से चुनावों में पैसे और पावर का उपयोग आम छात्रों के साथ नहीं हो सकता।
दूसरा कारण उनकी ‘आम आदमी’ की छवि है। उनके पिता दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में बस कंडक्टर हैं और मां आंगनवाड़ी में काम करती हैं। इस परिवार का साधारण जीवन और बिना किसी राजनीतिक रसूख की कहानी ने उन्हें अलग कर दिया।
तीसरा कारण ‘चप्पल-जूते न पहनने का प्रण’ है। 6 सितंबर को सत्य निकेतन में हुई दुखद दुर्घटना के बाद दीपांशु ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने वोटिंग से कुछ दिन पहले मलबा हटाने के लिए वीडियो बनाया और घोषणा की कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलेगा, वे जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे।
चौथा कारण दिल्ली और जाट कनेक्शन है। दीपांशु के अलावा DUSU के तीनों प्रमुख पदों पर दिल्ली से होने वाले छात्र जीते हैं। उनके साथ अध्यक्ष पद पर यश डबास कंझावला और सचिव पद पर रिया चावड़ी बदरपुर के छात्र भी हैं।
इस जीत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव लाया है। अब DUSU की वाइस प्रेसिडेंट दीपांशु शौकीन ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार चुनाव जीतने के बाद वाइस चांसलर के सामने धरना देने की योजना बनाई है।
