ब्रेकिंग: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच सरकार ने डीजल-ATF एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ाया, पेट्रोल टैक्स में कटौती

राहुल शर्मा
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अमेरिका और ईरान के बीच जंग तेज होने से मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है और तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं. इसी बीच मोदी सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स में बड़ा बदलाव कर दिया है. सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में भारी बढ़ोतरी की है, जबकि पेट्रोल पर इसमें कटौती की गई है.

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाला टैक्स 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर यह टैक्स 7.5 रुपये से बढ़कर 14.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है. नई दरें 16 जुलाई से ही लागू हो गई हैं. दूसरी तरफ, पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 4 रुपये प्रति लीटर घटाया गया है.

जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए उछाल के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है. दरअसल, जब ग्लोबल मार्केट में क्रूड महंगा होता है, तो रिफाइनरी कंपनियों को निर्यात से ज्यादा मुनाफा होने लगता है. इसी अतिरिक्त मुनाफे को रोकने और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए विंडफॉल टैक्स लगाया जाता है.

इससे पहले जुलाई की शुरुआत में जब अमेरिका-ईरान तनाव कुछ कम हुआ था, तब सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाया था और डीजल-एटीएफ पर घटाया था. अब हालात बदलते ही फैसला फिर पलट दिया गया है. यह टैक्स हर पखवाड़े समीक्षा के बाद तय होता है.

आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि इस फैसले का असर पेट्रोल पंप पर मिलने वाले तेल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा. विंडफॉल टैक्स केवल निर्यातकों पर लगता है, घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं. इसलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या चेन्नई में पेट्रोल-डीजल के रेट पहले जैसे ही रहेंगे.

गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये, कोलकाता में पेट्रोल 113.48 रुपये और डीजल 99.82 रुपये, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 107.78 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर है.

बाजार के जानकार मानते हैं कि अगर अमेरिका-ईरान युद्ध लंबा खिंचा तो कच्चा तेल और महंगा हो सकता है. ऐसे में सरकार आने वाले दिनों में टैक्स दरों में और बदलाव कर सकती है. फिलहाल निर्यातक कंपनियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जबकि घरेलू ग्राहक इससे बेअसर रहेंगे.

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