बीजेपी ने नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान किया, जिसमें नितिन नवीन ने बड़े फेरबदल किए। यह बदलाव 2026 के चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उपाध्यक्ष पदों में वसुंधरा राजे, बैजयंत पांडा, तारिक मंसूर और रेखा वर्मा को बरकरार रखा गया। सरोज पांडेय, डीके अरुणा, एम. चुबा आओ, एपी अब्दुल्लाकुट्टी, लक्ष्मीकांत वाजपेयी और लता उसेंडी को हटाया गया।
पुराने चेहरों की वापसी हुई। राम माधव, एम. नागराज, डॉ. मधुचंद्रा कर, लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। वसुंधरा राजे, तीरथ सिंह रावत, बिप्लब कुमार देब भी टीम में शामिल हैं।
महासचिवों में बड़ा फेरबदल देखा गया। विनोद तावड़े और सुनील बंसल को पद पर बने रहने दिया गया। अरुण सिंह, दुष्यंत गौतम, तरुण चुघ, राधामोहन दास अग्रवाल को हटाया गया। हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया, वहीं स्मृति ईरानी भी राष्ट्रीय महासचिव बनीं। गजेंद्र पटेल को भी महासचिव की जिम्मेदारी दी गई।
संगठन महामंत्री में भी बदलाव हुआ। शिवप्रकाश को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) पर बने रहने दिया गया। सौदान सिंह को उपाध्यक्ष से हटाकर संयुक्त महासचिव (संगठन) बनाया गया, जिससे पार्टी में दो संयुक्त महासचिव पद बन गए।
सचिव पदों में बड़े बदलाव किए गए। अरविंद मेनन, पंकजा मुंडे, अलका गुर्जर, ओम प्रकाश धुर्वे, नरेंद्र सिंह, रितुराज सिन्हा, कामाख्या प्रसाद ताशा, सुरेंद्र नागर, ओम प्रकाश धनखड़ और मनजिंदर सिंह सिरसा को सचिव पद से हटाया गया। रितुराज सिन्हा को प्रकोष्ठ संकुल सह‑संयोजक बनाया गया। संगीता यादव, मृगांक बर्मन, फांगनोन कोन्याक को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। डॉ. स्वदेश सिंह भी राष्ट्रीय सचिव बने।
कोषाध्यक्ष में बदलाव हुआ। राजेश अग्रवाल और नरेश बंसल को हटाया गया। पीयूष गोयल फिर से कोषाध्यक्ष बने, जिनके पिता वेद प्रकाश गोयल भी पहले कोषाध्यक्ष रहे चुके हैं।
अमित मालवीय और संजय मयूख को जगह नहीं मिली। अमित मालवीय को आईटी सेल संयोजक नहीं रखा गया, जबकि प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को मीडिया सह‑संयोजक की जिम्मेदारी दी गई।
पार्टी ने 2029 चुनाव को ध्यान में रखकर क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर जोर दिया। 40% से अधिक सदस्य वंचित समाज से आते हैं। उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत को प्रतिनिधित्व दिया गया। आंध्र प्रदेश से डी. पुरंदेश्वरी, तमिलनाडु से एम. वेंकटेशन को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सचिव बनाया गया। उम्र के हिसाब से 40 से कम उम्र के 6, 40‑49 के 15, 50‑59 के 21 नेताओं को जगह दी गई।
इन बदलावों को 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति के लिहाज से देखा जा रहा है। पार्टी उम्मीद कर रही है कि नई टीम वोटरों को आकर्षित करेगी और चुनावी सफलता दिलाएगी।
