अखिलेश यादव ने सरप्राइज से बिगाड़ा बीजेपी का गणित, राज्यसभा के 8वें उम्मीदवार को मिलेगी ये चुनौती
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की होने वाली राज्यसभा चुनाव में उद्योगपति धनराज नथवानी को सरप्राइज उम्मीदवार बनाकर बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
धनराज नथवानी राज्यसभा चुनाव में सपा का चेहरा बन गए हैं और उनकी उम्मीदवारी ने बीजेपी के आठवें उम्मीदवार को मैदान में उतारने की योजना को मुश्किल बना दिया है.
उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं. बीजेपी के पास विधायक संख्या के हिसाब से सात सीटें आसान हैं, वहीं सपा के पास दो सीटें लगभग पक्की हैं. ऐसे में 10वीं सीट पर सीधा मुकाबला होना है, जिसे लेकर दोनों दल पूरी तरह से तैयार हैं.
सपा ने जिस तरह से उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी को अपने सरप्राइज उम्मीदवार के तौर पर उतारा है, उससे बीजेपी की नींद उड़ गई है. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या धनराज नथवानी के सामने बीजेपी अपना 8वां उम्मीदवार उतार पाएगी? क्योंकि इस नाम को समाजवादी पार्टी के लिए ट्रम्प कार्ड माना जा रहा है.
धनराज परिमल नथवानी जामनगर में रिलायंस पेट्रोलियम के निदेशक हैं. उनके पिता परिमल नथवानी झारखंड से बीजेपी समर्थित प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा सांसद बन चुके हैं. यह परिवारिक राजनीतिक जुड़ाव सपा के लिए फायदेमंद माना जा रहा है.
बीजेपी के लिए आठवीं सीट अब लगभग नामुमकिन होती जा रही है. बीजेपी के पास फिलहाल 254 विधायक हैं, जबकि उसके सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए के पास 284 विधायक हैं. सात राज्यसभा सीटों को जीतने के लिए 266 विधायकों का वोट चाहिए. इस लिहाज से बीजेपी के पास 18 विधायक अतिरिक्त हैं, जिनमें सपा से निष्कासित चार विधायकों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 22 पर पहुँच जाता है. बीजेपी को 8वीं सीट के लिए 16 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी.
बीजेपी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है क्रॉस वोटिंग. पिछले चुनाव में जिन लोगों ने क्रॉस वोटिंग की थी, उनमें से तीन विधायक इस बार फिर से समाजवादी पार्टी के पक्ष में वोट दे सकते हैं. पल्लवी पटेल, आशुतोष मौर्य और विनोद चतुर्वेदी जैसे विधायक सपा के टिकट पर जीते थे, लेकिन अब उनकी पार्टी के साथ रिश्ते बिगड़े हुए हैं. ऐसे में इन तीनों विधायकों के सपा की तरफ लौटने की संभावना है.
क्रॉस वोटिंग का डर समाजवादी पार्टी को नहीं बल्कि बीजेपी के सहयोगी दलों को सबसे ज्यादा है. ओमप्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद की पार्टी के विधायक धनराज परिमल नथवानी के निशाने पर हो सकते हैं. राजा भैया की पार्टी के विधायक भी राज्यसभा चुनाव में वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं. इसलिए बीजेपी के लिए आठवीं सीट जीतना अब लगभग नामुमकिन सा होता जा रहा है.
समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं (कुछ बागी और निष्कासित विधायकों को मिलाकर). दो सीटों के लिए उसे आसानी से 76 विधायकों का समर्थन मिल सकता है, जिससे उसके पास 24 अतिरिक्त वोट रहेंगे. तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 14 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. सपा ने धनराज परिमल नथवानी को उतारकर बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है. सपा की नजर अपने बागी विधायकों को साधने के साथ-साथ बीजेपी के सहयोगी दलों के विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराने पर है.
सुभासपा के 6 में से 4 विधायक सपा बैकग्राउंड के हैं, जिनमें से तीन विधायक अपनी गाड़ी में सपा का झंडा लगाकर घूम रहे हैं. सपा अगर सुभासपा के तीन विधायकों को अपने साथ जोड़ लेती है तो यह संख्या 27 पर पहुँच जाएगी. इसके अलावा आरएलडी के तीन विधायक भी सपा बैकग्राउंड के हैं (दो मुस्लिम और एक गुर्जर समाज से). अगर सपा इन दोनों मुस्लिम विधायकों को अपने साथ जोड़ती है तो यह आंकड़ा 29 विधायकों पर पहुँच जाएगा.
इसके बाद भी सपा को तीसरी सीट के लिए 9 अतिरिक्त विधायकों के वोट की आवश्यकता होगी. बीजेपी के लिए आठवीं सीट कितनी मुश्किल? राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 नामांकन पत्र खरीदे हैं, जिससे एक बात साफ है कि 2024 की तरह ही वह फिर से 8वें प्रत्याशी को उतारने का प्लान बना रही है. बीजेपी के पास फिलहाल अपने 254 विधायक हैं. बीजेपी के सहयोगी दलों में अपना दल (एस) के 13, सुभासपा के 6, निषाद पार्टी के 5 और आरएलडी के 9 विधायक हैं. इन सभी को मिलाने पर आंकड़ा 287 विधायकों का होता है. एनडीए के 287 विधायकों में से सुभासपा के तीन विधायकों को हटा दें, तो एनडीए के पास 284 विधायक बचते हैं. सात राज्यसभा सीटों को जीतने के लिए 266 विधायकों का वोट चाहिए. इस लिहाज से बीजेपी के पास 18 विधायक अतिरिक्त बचते हैं, जिनमें सपा से निष्कासित 4 विधायकों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 22 पर पहुँच जाता है. बीजेपी को 8वीं सीट के लिए 16 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी.
अगर बीजेपी अपने 8वें उम्मीदवार के लिए सपा के तीन बागी विधायकों का समर्थन फिर से जुटा लेती है, तब भी एनडीए का आंकड़ा 25 तक ही पहुँचेगा. इसके बाद भी उसे 13 अतिरिक्त वोट चाहिए होंगे. राजा भैया की पार्टी के दो विधायकों का समर्थन मिल भी जाता है, तब भी 11 वोटों की कमी रहेगी. राजा भैया ने यह साफ नहीं किया है कि वह किसे वोट देंगे. ऐसे में बीजेपी के लिए सपा से भी ज्यादा अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा, जो धनराज नथवानी के मैदान में उतरने के बाद बिल्कुल आसान नहीं दिख रहा है.
निष्कर्ष: धनराज नथवानी राज्यसभा चुनाव में सपा की तरफ से एक बड़ा ट्रम्प कार्ड बनकर सामने आए हैं. यह कदम अखिलेश यादव की रणनीति का हिस्सा है, जिसने बीजेपी के गणित को हिला दिया है. अब बीजेपी के लिए आठवीं सीट जीतना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिसके लिए उसे अपने सहयोगियों और बागी विधायकों के वोटों की आवश्यकता होगी. यह मुकाबला निश्चित रूप से दिलचस्प होने जा रहा है.
