हरिद्वार में चाय की दुकान पर फांसी लगाकर सुरेंद्र कोली ने की आत्महत्या, निठारी कांड में बरी होने के बाद उठाया कदम

राहुल शर्मा
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हरिद्वार, 18 सितंबर 2026: बहुचरित निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह पिछले कुछ दिनों से भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान चला रहा था। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मौत के आसपास की जांच शुरू कर दी।

सुरेंद्र कोली हरिद्वार शहर कोतवाली क्षेत्र के भूपतवाला में रहता था। वहीं उसने पिछले कुछ दिनों से चाय की दुकान चलाई। दुकान में ही उसने फांसी लगा ली। सूचना मिलते ही पुलिस घटना स्थल पर पहुंची। शव को कब्जे में ले लिया गया और आगे की कार्रवाई आरंभ हुई।

पुलिस के अनुसार, सुबह करीब 11:30 बजे इस संबंध में कॉल आई। घटना स्थल पर पहुंचकर जब मृतक की पहचान मांगी गई, तो उसने अपना नाम सुरेंद्र कोली बताया। मिली पहचान पत्र की जांच के बाद पता चला कि वह निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली ही है।

कोतवाली थाने के एसएचओ कुंदन सिंह राणा ने बताया कि मृतक के पास मिली ID निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोली से मेल खाती है। उनके मुताबिक, रस्सी को ऊपर से बाँधकर फांसी लगाई गई थी। अब पुलिस मौत के पीछे के कारणों की जांच कर रही है।

सुरेंद्र कोली की मौत के बाद निठारी कांड फिर से चर्चा में आ गया। यह कांड दिल्ली के निठारी इलाके में 2005 से 2006 तक बच्चों और महिलाओं के लापता होने की घटनाओं से जुड़ा है। लापता होने के कई मामले दर्ज हुए थे।

पुलिस की छानबीन के बाद 29 दिसंबर 2006 को उसे सेक्टर-31 की D-5 कोठी तक ले जाया गया। यह कोठी व्यापारी मोनिन्दर सिंह पंढेर की थी। कोठी के पीछे मौजूद नाले और आसपास के इलाके की तलाशी में कई मानव खोपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और अन्य चीजें मिलीं। इन बरामदगियों के बाद मोनिन्दर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया।

जनवरी 2007 में इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। इस दौरान गुमशुदगी और अपराध से जुड़े कुल 19 अलग-अलग FIR दर्ज किए गए। इनमें से 16 मामलों में CBI ने चार्जशीट दाखिल की। सुरेंद्र कोली पर हत्या, बलात्कार, अपहरण और सबूतों को नष्ट करने जैसे गंभीर आरोप लगे।

हालांकि, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े आखिरी मामले में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा कि उसे दोषी ठहराने और सजा सुनाने के लिए पिछली अदालतों ने जिन सबूतों का उपयोग किया, वे कानूनी कसौटी पर खरे नहीं उतरे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह भी कहा गया कि पुराने सबूत अवैध, भरोसे मात्मात और आपस में विरोधी थे। इसी कारण अदालत ने उसे इस मामले में राहत देकर बरी कर दिया।

फिर भी हरिद्वार में उसकी मौत की खबर ने इस पुराने मामले को फिर चर्चा में ला दिया। पुलिस मृतक की पहचान के बाद मौत से जुड़े हर पहलू को शामिल करते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।

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