ईरान युद्ध की खुफिया जानकारी लीक होने पर ट्रंप का कड़ा एक्शन, 50 सैन्य अफसरों का पॉलीग्राफ टेस्ट
अमेरिका में ईरान युद्ध से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मीडिया तक पहुंचने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पेंटागन ने इस सिलसिले में करीब 50 ज्वाइंट स्टाफ सदस्यों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया है। इनमें सैन्य अधिकारी और कुछ नागरिक कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच का फोकस उन खबरों पर है जिनमें युद्ध के दौरान अमेरिका के अहम हथियारों की कमी का जिक्र था।
यह जानकारी अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट से सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने इन लोगों से पूछा गया था कि क्या उन्होंने हथियारों के घटते भंडार की जानकारी किसी पत्रकार को दी थी। पॉलीग्राफ टेस्ट को आम भाषा में लाई डिटेक्टर टेस्ट कहते हैं। इसमें सवाल-जवाब के दौरान सांस, दिल की धड़कन और शरीर के बदलाव रिकॉर्ड किए जाते हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि तनाव का मतलब हमेशा झूठ नहीं होता, इसलिए इसे जांच का एक हिस्सा ही माना जाता है, अंतिम सबूत नहीं।
मामला सिर्फ सामान्य सैन्य जानकारी लीक होने का नहीं है। ईरान के साथ संभावित युद्ध में जिन हथियारों की अहमियत सबसे ज्यादा है, उनकी कमी की बात बाहर आई थी। इसी वजह से जांचकर्ता पता लगाने में जुटे हैं कि यह जानकारी सैन्य तंत्र के भीतर से बाहर कैसे पहुंची। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने जांच की डिटेल देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि विभाग आंतरिक जांच या कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करता। साथ ही उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हर लीक को गंभीरता से लिया जाता है।
पेंटागन अमेरिका के रक्षा विभाग का मुख्यालय है जो वर्जीनिया के आर्लिंगटन में स्थित है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि ईरान युद्ध के दौरान हथियारों की स्थिति से जुड़ी खुफिया जानकारी पत्रकारों तक आखिर कैसे पहुंच गई। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं।
