पीएम मोदी के बचपन के दोस्त असगर अली वोरा के जमीन विवाद में अब और गहराई आ गई है। बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता पीछे हटे हैं, लेकिन इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि वोरा को उनकी जमीन कब्जे में कभी नहीं मिलेगी। इस मामले में अब बिल्डर्स और वोरा दोनों पक्षों के बीच नई कानूनी झड़प शुरू हो गई है।
पूरा मामला तो इस तरह है। वोरा का दावा है कि उन्होंने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका आरोप है कि 2011 में स्वयं बिल्डर्स और नरेंद्र मेहता की कंपनी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस ने इसी जमीन पर कब्जा कर लिया। लगभग 15 साल से वोरा विभिन्न सरकारी एजेंसियों में इस जमीन को लेकर परेशान हैं।
बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने हाल ही में इस विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने की घोषणा की और अपनी कंपनी को दी गई निर्माण अनुमति भी वापस लेने की जानकारी दी। मेहता ने पुलिस कमिश्नर को भी पत्र लिखकर वोरा के खिलाफ पहले दर्ज की गई शिकायत वापस लेने की बात कही। उनके मुताबिक, यह कदम दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद उठाया गया है।
लेकिन यहाँ रुकना नहीं है। मेहता ने स्पष्ट किया है कि जमीन असगर अली वोरा को नहीं दी जाएगी। उनके अनुसार, लेन-देन रद्द होने के बाद जमीन वापस मर्विन फर्नांडिस के पास जाएगी। मेहता का कहना है कि उन्होंने अदालत के आदेश के आधार पर जमीन खरीदी थी, जिसमें प्लॉट का 50 फीसदी हिस्सा मर्विन फर्नांडिस के पक्ष में था। उन्होंने आगे कहा कि उस आदेश को कोई चुनौती नहीं दी थी।
वहीं, स्वयं बिल्डर्स की ओर से भी वोरा पर कड़े सवाल उठाए जा रहे हैं। डेवलपर शेफाली जैन का कहना है कि वोरा जनवरी 2026 में इस केस में हार चुके हैं और अब 90 दिन की अवधि बीतने के बाद उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की है। उनके अनुसार, अदालत के आदेश में साफ लिखा था कि वोरा सह-मालिक की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी पेश करने में असफल रहे हैं।
शेफाली जैन का और दावा है कि 1989 में वोरा की ओर से 1.51 लाख रुपये के भुगतान का कोई सबूत नहीं मिला। जमीन पर स्वंय बिल्डर्स का कब्जा है और अदालत का आदेश उनके पक्ष में है। साथ ही 1.16 करोड़ रुपये के भुगतान का एग्रीमेंट भी मौजूद है। उन्होंने कहा है कि कंपनी वोरा के खिलाफ जरूरी कानूनी कार्रवाई करेगी।
बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने इस विवाद के पीछे स्थानीय राजनीति को भी एक कारक बताया। उन्होंने बिना नाम लिए शिवसेना नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि स्थानीय नेता उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। मेहता का मानना है कि स्थानीय चुनाव में गठबंधन न करने के कारण कुछ लोग उनसे नाराज हैं।
इसके बीच, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद सरकारी स्तर पर भी मामले में हलचल बढ़ी है। मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकृष्ण परदेशी ने मंत्रालय में इस मामले पर बैठक की। इस बैठक में असगर अली वोरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम की कमिश्नर राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए। वोरा ने अपनी पूरी बात रखी और पीएम मोदी से सकारात्मक जवाब मिलने का दावा किया।
अब मामला कानूनी मोर्चे पर और भी जटिल दिख रहा है। दोनों पक्षों के पास अपने-अपने दावे हैं और कोई स्पष्ट समाधान दिख नहीं रहा। PM मोदी के दोस्त जमीन विवाद में जो बीजेपी विधायक पीछे हटे, वहाँ से भी मुद्दे और गहरे होते जा रहे हैं। अब अगली सुनवाई का इंतजार है और दोनों तरफ से कानूनी कार्रवाई जारी है।
