जेल से न चले सरकार: पीएम-सीएम रिमूवल बिल में JPC ने किए बड़े बदलाव, 31वें दिन छिनेगी कुर्सी

राहुल शर्मा
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जुंटा ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा कर दी है. इस रिपोर्ट में पीएम-सीएम रिमूवल बिल जेपीसी संशोधन के कई अहम बदलाव सुझाए गए हैं.

समिति ने कहा है कि कोई भी नेता जेल में रहने के दौरान सरकार नहीं चलाना चाहिए. इसलिए संविधान में एक नया नियम जोड़ा गया है, जो कहता है कि अगर कोई मंत्री या मुख्यमंत्री लंबे समय तक हिरासत में रहता है तो तुरंत पद से हटाया जा सकता है.

रिपोर्ट में ‘सनसेट क्लॉज’ का भी जिक्र है, जिसका मतलब है कि पद से हटाया गया कोई भी व्यक्ति तय समय सीमा के बाद फिर से अपना कार्यभार संभाल सकता है, बशर्ते वह निर्दोष साबित न हो.

समिति ने यह भी सुझाया है कि सिर्फ गंभीर आपराधिक मामलों में ही हिरासत के बाद पद से हटाया जाए, और उन मामलों में तेज़ अदालतों का गठन किया जा सकता है.

अगर कोई मंत्री 31वें दिन तक इस्तीफा नहीं देता, तो उसे मंत्रिपरिषद से हटाने का प्रावधान रखा गया है, पर उसकी सदस्यता नहीं रद्द की जाएगी.

जेपीसी ने यह स्पष्ट किया है कि यह बदलाव सिर्फ उसी अपराध के लिए लागू होगा, जिसके तहत पाँच साल या अधिक की सजा संभव हो. अन्य मामलों में यह प्रावधान नहीं लागू होगा.

रिपोर्ट के अनुसार, अगर निर्धारित समय में आरोपी छूट जाता है या बरी हो जाता है, तो वह फिर से अपने पद पर लौट सकता है. यह सुनिश्चित करता है कि निर्दोष को हमेशा के लिए पद से नहीं हटाया जाए.

अब यह विधेयक फिर से कैबिनेट में पेश होगा और अगले सत्र में संसद में पेश किया जाएगा. इसे पारित करने के लिए दोनों सदनों में दो‑तिहाई बहुमत की जरूरत होगी.

विरोधी दलों ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है और उन्होंने जेपीसी में अपने सदस्य नहीं बनाए. इसलिए सरकार को इसे पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा.

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