पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मक्का की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि मक्का पर हमला होने की सूरत में किसी समझौते की जरूरत नहीं है. हर मुसलमान पर इस पवित्र शहर की हिफाजत का फर्ज पहले से ही है. जियो न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान मक्का समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाने को पूरी तरह तैयार है.
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है. सऊदी अरब ने दावा किया था कि यमन के हूती विद्रोहियों ने मक्का पर ड्रोन से हमले की कोशिश की. हालांकि सऊदी एयर डिफेंस ने इस ड्रोन को मार गिराया. हूतियों ने इस आरोप को खारिज किया था. लेकिन मक्का पर हमले की कोशिश की पूरी दुनिया में निंदा हुई. पाकिस्तान ने भी इसकी कड़ी निंदा की थी.
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले जब हूती विद्रोही पाकिस्तान पर हमले कर रहे थे, तब पाकिस्तान ने अलग रुख अपनाया था. तब कहा गया था कि मक्का समझौता पुराने विवादों पर लागू नहीं होता. इस वजह से पाकिस्तान ने कोई कदम नहीं उठाया. लेकिन अब मक्का पर खतरा देख पाकिस्तान ने अपना पैंतरा बदल लिया है.
गुरुवार को विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में इस समझौते को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई. उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब पर हालिया हूती हमले रोकने के लिए कोई तरीका अपनाएगा. इस पर खान ने कहा कि पाकिस्तान समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. मगर कब, कैसे, कहां और किन टारगेट के खिलाफ कार्रवाई होगी, यह गोपनीयता के कारण नहीं बताया जा सकता.
प्रवक्ता ने बाब अल-मंदेब की स्थिति को बेहद गंभीर बताया. उन्होंने हूतियों से अपनी गतिविधियां रोकने की अपील की. कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है. यह पाकिस्तान, ईरान और पूरे क्षेत्र के हित में है. हमारी कोशिश बातचीत और कूटनीति से अमन बहाली की है, जबरदस्ती के उपायों से नहीं.
ख्वाजा आसिफ ने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब की चिंताएं ईरान तक पहुंचा दी हैं. उन्हें नहीं लगता कि ईरान कोई नया मोर्चा खोलेगा. तेहरान पहले से ही क्षेत्रीय संघर्षों में उलझा हुआ है. आसिफ ने ईरानी सरकार और गैर-सरकारी समूहों में फर्क बताया. कहा कि ऐसे समूह सरकार की मंजूरी के बिना भी काम कर सकते हैं. हूती-सऊदी टकराव में ईरान का किसी एक तरफ झुकना समझदारी नहीं होगी.
पाक रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका मुल्क इस टकराव को दूसरे इलाकों में फैलने से रोकने की कोशिश करता रहेगा. उन्होंने माना कि समुद्री रास्तों में रुकावट से व्यापार और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है. यह पाकिस्तान के लिए खास तौर पर अहम है क्योंकि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर हो रहा है. पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच पिछले महीने त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर दस्तखत हुए थे. इसमें सामूहिक सुरक्षा का ढांचा है और किसी एक पर हमले को सब पर हमला माना गया है.
