नेपाल में बाढ़ ने तबाही मचाई हुई है। सैकड़ों लाशें मिट्टी और कीचड़ में दबी मिली हैं। ये शव तेजी से सड़ रहे हैं, जिससे इनकी पहचान मुश्किल होती जा रही है। इसी वजह से नेपाल प्रशासन इन शवों को जलाने की जगह सामूहिक दफनाने का फैसला कर रहा है। officials का कहना है कि यह अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि एक सुरक्षित तरीके से संरक्षण है, ताकि भविष्य में डीएनए जाँच के बाद परिजनों को उनके अवशेष सौंपे जा सकें।
कीचड़ और पानी में दबी लाशें इतनी बुरी हालत में हैं कि अब उन्हें कुछ ही दिनों तक सुरक्षित रखा नहीं जा सकता। कुछ ही इलाकों से सैकड़ों शव एक साथ मिले हैं। इन शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए जगह नहीं है, साथ ही सड़ने से बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। इसलिए स्थानीय प्रशासन ने शवों को दफनाने का रास्ता चुना है।
नेपाल के आठ जिलों से अब तक करीब ७६८ शव बरामद किए गए हैं। इनमें से सिर्फ २० की ही पहचान हो पाई है। चितवन में सबसे ज्यादा २५९ शव मिले हैं, उसके बाद नवलपरासी पूर्व १८४, नवलपरासी पश्चिम ८२, गोरखा ५८, नुवाकोट ५२, धाडिंग ५०, तनहुन ३६ और रसुवा १३ शव हैं।
मोर्टारूम और अस्थायी सुविधा केंद्र अब शवों से भर चुके हैं। तेजी से सड़ने के कारण इन्हें सुरक्षित रखना लगभग नामुमकिन हो गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सड़े हुए शवों से फैलने वाली दुर्गंध से महामारी का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए शवों को दफनाने का फैसला लिया गया है।
नेपाल सरकार ने शवों के प्रबंधन के लिए साल २०२६ का एक नया निर्देश जारी किया है। इसके तहत चितवन जिला सुरक्षा समिति ने भरतपुर महानगरपालिका के देवघाट में एक खुले मैदान में अज्ञात और अनिदिष्ट शवों को दफनाने का निर्णय लिया है।
शवों को दफनाने से पहले फोरेंसिक टीमें डीएनए सैंपल ले रही हैं। हर शव को एक स्थायी पहचान नंबर दिया जा रहा है। साथ ही उनकी तस्वीरें, शारीरिक विवरण, कपड़े, गहने, पहचान पत्र और अन्य सामान भी उसी नंबर के साथ सुरक्षित रखे जा रहे हैं। अधिकारियों ने कब्रों की तारीख, सटीक स्थान और शवों की डीएनए प्रोफाइल का रिकॉर्ड भी रखा है।
भविष्य में गुम हुए लोगों के रिकॉर्ड को रिश्तेदारों से मिले डीएनए सैंपल से मिलाया जाएगा, ताकि परिवार को अपने खोए हुए सदस्यों की पहचान करने का मौका मिल सके। नेपाल प्रशासन अब एक नाजुक स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है—एक तरफ सड़ते शवों से होने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को रोकना है, दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना है कि परिवार अपने अपनों की पहचान का मौका न खोएँ।
नेपाल बाढ़ अज्ञात शव दफनाना डीएनए पहचान प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया है, ताकि मृतकों के परिजन भविष्य में डीएनए जाँच के बाद उनके अवशेष प्राप्त कर सकें।
