मौलाना फजलुर रहमान की पाकिस्तान टूटने की चेतावनी 1971 की याद दिलाते हुए बयान आया है। उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर निशाना साधा। उनका कहना है कि सेना के पास ताकत भले ही हो, लेकिन इतिहास को नहीं भुलाया जा सकता। उन्होने 1971 के युद्ध का जिक्र किया। जनरल याहया खान ने जनता से लड़ी जाने की बात कही, लेकिन अगले ही दिन सेना ने हथियार डाल दिए। इस बयान से पाकिस्तान के टूटने की आशंका एक बार फिर उभर कर सामने आई है।
मौलाना ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के हालात पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इन इलाकों में जंग जैसे हालात बने हुए हैं। लगातार खून बह रहा है। उन्होने पीओके के रावलाकोट में चल रहे प्रदर्शन का भी जिक्र किया। वहां लोग करीब तीन महीने से धरना दे रहे हैं। लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही। ऐसी स्थिति में अलगाव की मांग करने वालों को मजबूत होने का मौका मिल रहा है।
मौलाना ने सवाल उठाया कि आखिर इन हालात का मकसद क्या है। उनका कहना है कि जब किसी इलाके में लंबे समय तक खून बहता है तो यह भौगोलिक बदलावों का संकेत भी बन सकता है। उन्होने अफगानिस्तान में करीब 45-46 साल से जारी संघर्ष का उदाहरण दिया। इस पूरे क्षेत्र में खून बह रहा है। पाकिस्तान को अपने इरादों के बारे में जनता को स्पष्ट करना चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के कई इलाकों में सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं। 1971 के संदर्भ और भौगोलिक बदलाव वाले उनके बयान ने सेना और सरकार के सामने नई राजनीतिक बहस खड़ी कर दी है। लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या मकसद ही मुल्क को तोड़ना है।
