नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026: भाजपा संगठन पुनर्गठन में 6 नेता राज्य प्रभारी बनाए गए हैं. भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम के महामंत्रियों को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी है. स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, राम माधव, सतीश पूनिया, सुनील बंसल और अनिल एंटनी को मिली जिम्मेदारियों से पार्टी में उनका सांगठनिक और सियासी कद मजबूत हुआ है.
भाजपा ने चुनावी तैयारियों और संगठन विस्तार को ध्यान में रखते हुए कुछ पुराने और भरोसेमंद चेहरों पर फिर दांव लगाया है. वहीं, कुछ नए चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. इन नेताओं को ऐसे राज्यों का प्रभार मिला है, जहां पार्टी के लिए सत्ता बनाए रखना या नया विस्तार करना दोनों अहम चुनौतियां हैं.
नई जिम्मेदारियों के मुताबिक स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा, हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक, सतीश पूनिया को पंजाब और जम्मू-कश्मीर का प्रभार मिला है. राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड, सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना तथा अनिल एंटनी को नागालैंड का प्रभार और गोवा का सह-प्रभार सौंपा गया है.
पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए इन राज्यों के प्रभारियों की भूमिका खास मानी जा रही है. वहीं, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे राज्य भाजपा के विस्तार की दृष्टि से अहम हैं.
हरीश द्विवेदी के लिए बिहार और कर्नाटक की जिम्मेदारी बड़ी मानी जा रही है. बस्ती से दो बार सांसद रह चुके द्विवेदी पार्टी के भरोसेमंद सांगठनिक चेहरों में शामिल हैं. वे पहले राष्ट्रीय सचिव के रूप में बिहार का प्रभार संभाल चुके हैं. बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से जुड़ाव और संगठन को अनुशासित तरीके से चलाने की छवि के कारण केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर फिर भरोसा जताया है.
नितिन नवीन की टीम में हरीश द्विवेदी को महामंत्री बनाया गया था. इसके बाद उन्हें युवा मोर्चे की जिम्मेदारी भी सौंपी गई. अब बिहार के साथ कर्नाटक का प्रभार मिलने से उनकी भूमिका और अहम हो गई है.
स्मृति ईरानी को लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद भी पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रखा है. पहले उन्हें महामंत्री बनाया गया, अब छत्तीसगढ़ और हरियाणा की कमान सौंपी गई है. पार्टी कैडर और सार्वजनिक मंचों पर अपने तीखे अंदाज से पहचान बनाने वाली स्मृति ईरानी अब इन राज्यों में संगठन को मजबूत करने और रणनीतिक अभियानों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगी.
राम माधव की भूमिका भी फिर अहम हो गई है. साल 2020 में राष्ट्रीय महासचिव पद से हटने के बाद वे आरएसएस के कार्यक्षेत्र में लौट गए थे. अब भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में उनकी वापसी हुई और उन्हें तमिलनाडु व उत्तराखंड का प्रभार मिला है.
राम माधव के लिए दोनों राज्य अलग-अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं. तमिलनाडु में भाजपा को अभी अपना विस्तार करना है. वहीं, उत्तराखंड में पार्टी के सामने लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का लक्ष्य है. भाजपा और आरएसएस के बीच समन्वय तथा लंबी चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है.
सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना का प्रभार पहले की तरह बनाए रखा गया है. उत्तर प्रदेश में पार्टी को सांगठनिक आधार देने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिली थी. ओडिशा में भाजपा की सफलता और पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है.
सुनील बंसल पर्दे के पीछे रहकर काम करने और जमीनी स्तर पर कैडर को जोड़ने के लिए जाने जाते हैं. पार्टी में उन्हें ‘इलेक्शन इंजीनियर’ भी कहा जाता है. अब तेलंगाना में पार्टी का विस्तार और पश्चिम बंगाल में संगठन को मजबूत करना उनकी अहम जिम्मेदारी होगी.
सतीश पूनिया के लिए पंजाब और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी अहम मानी जा रही है. राजस्थान के 2023 विधानसभा चुनाव में आमेर सीट से हार के बाद उनकी भूमिका को लेकर कई कयास लगाए गए थे. लेकिन हरियाणा की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने भाजपा को वहां लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने में भूमिका निभाई.
इस सफलता के बाद पूनिया को राज्यसभा भेजा गया और नितिन नवीन की टीम में महामंत्री बनाया गया. उन्हें अनुसूचित जनजाति मोर्चे की भी जिम्मेदारी मिली थी. अब पंजाब और जम्मू-कश्मीर में संगठन मजबूत करना उनके कंधों पर होगा.
अनिल एंटनी का सफर भी तेजी से आगे बढ़ा है. पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के पुत्र और कांग्रेस के पूर्व नेता अनिल एंटनी के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया था. अब उन्हें नागालैंड का प्रदेश प्रभारी और गोवा का सह-प्रभारी बनाया गया है.
केरल से आने वाले अनिल एंटनी को दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राजनीतिक समीकरणों को संभालने की जिम्मेदारी मिली है. गोवा में भी अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां भाजपा पिछले दस साल से सत्ता में है. इसलिए वहां सत्ता बनाए रखना भी उनकी अहम जिम्मेदारी होगी.
नए प्रभारियों की सूची से साफ है कि भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों, दक्षिण भारत में विस्तार और पूर्वोत्तर के संगठनात्मक समीकरणों को एक साथ साधने की तैयारी शुरू कर दी है. इसी कारण इन 6 नेताओं को सौंपी गई जिम्मेदारियों को महज बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी की आगे की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
