बलबीर पुंज ने राज्यसभा में भी अपनी भूमिका निभाई थी। वहां वे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते थे। संसद के अलावा, उन्होंने एक स्तंभकार और टिप्पणीकार के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई थी।
राजनीति में आने से पहले उनका लंबा करियर पत्रकारिता में रहा। उन्होंने साल 1971 में ‘द मदरलैंड’ से शुरुआत की। इसके बाद 1974 में वे ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ से जुड़े और यहां दो दशक से ज्यादा समय तक काम किया। बाद में वे ‘द ऑब्जर्वर ऑफ बिज़नेस एंड पॉलिटिक्स’ में कार्यकारी संपादक भी रहे।
मीडिया संगठनों में भी उनकी अच्छी पकड़ थी। वे ‘दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन’ के दो बार अध्यक्ष रहे। इसके अलावा ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ में महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने मीडिया ट्रेनिंग से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का नेतृत्व भी किया।
सिर्फ पत्रकारिता और राजनीति ही नहीं, उन्होंने कई अहम सार्वजनिक पदों पर भी काम किया। वे राष्ट्रीय युवा आयोग के अध्यक्ष रहे और दिल्ली वित्त आयोग के सदस्य भी बने। इससे साफ है कि वे नीति और प्रशासन से जुड़े मामलों में भी सक्रिय रहते थे।
अपने जीवन के आखिरी समय तक बलबीर पुंज लेखन से जुड़े रहे। वे हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लगातार लिखते थे। साल 2022 में उनके लंबे योगदान के लिए उन्हें लाइफ़टाइम देवर्षि नारद सम्मान दिया गया था।
उनका निधन भारतीय राजनीति और मीडिया जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
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