केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत द्वारा अमेरिकी कच्चे तेल के आयात को एक ‘रणनीतिक फैसला’ बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यापार समझौते के दबाव की वजह से नहीं हुआ है। गोयल के मुताबिक, भारत ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए यह कदम उठा रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बाद यह सवाल उठने लगे थे कि क्या अमेरिकी तेल खरीदने की शर्त डील में शामिल है। इस पर गोयल ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा, “यह डील किसी को कुछ खरीदने के लिए बाध्य नहीं करती। हमारा फैसला पूरी तरह वाणिज्यिक और रणनीतिक है।”
उन्होंने बताया कि अमेरिकी कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी का आयात भारत को तेल आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा। गोयल ने जोर देकर कहा कि तेल खरीदारी व्यापारिक कंपनियों पर निर्भर करती है, न कि सरकार पर।
व्यापार समझौते के फायदों के बारे में गोयल ने कहा कि इससे कपड़ा, चमड़ा, खिलौना और एमएसएमई सेक्टर को बड़े अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका भारतीय जेम्स, ज्वेलरी और जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ कम करेगा।
भारत की तरफ से अगले पांच सालों में 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान पुर्जे और कोयला खरीदने की योजना है। गोयल ने किसानों, मछुआरों और युवाओं को इस डील से होने वाले फायदों पर भी प्रकाश डाला।
वाणिज्य मंत्री ने साफ किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। उनके मुताबिक, यह डील किसी भी तरह के दबाव के बिना भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर की गई है।
