मंजीत नेगी ने कहा कि जब चीन ने अपने एजेंटों को पकड़ लिया, तो NSA अजित डोभाल का करियर खत्म हो गया था। लेकिन एक शेरपा की तीन बातों ने उसे एक नया दृष्टिकोण दिया।
आज बिहार की नई दिल्ली में आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में अजित डोभाल ने अपने करियर के शुरुआती दौर का एक महत्वपूर्ण किस्सा सुनाया। वह तब 20 के आसपास की उम्र में थे। सिक्किम में खुफिया जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
एक मिशन के लिए भेजी गई उनकी टीम कई दिनों तक वापस नहीं लौटी। बाद में पता चला कि चीनी सेना ने टीम को पकड़ लिया था। इस घटना ने डोभाल को गहराई से प्रभावित किया।
मामले की जांच शुरू हुई। उन्हें डर था कि एक बड़ी गलती के कारण अब आगे बढ़ने का रास्ता बंद हो जाएगा।
फिर जांच में कुछ ऐसा सामने आया जिससे पूरी तस्वीर बदल गई। इस दौरान डोभाल ने अपने साथ काम कर चुके एक पुराने तिब्बती शेरपा से बात की।
उस शेरपा ने उन्हें नक्शा पढ़ने की एक सीधी-सी बात समझाई। वही बात आगे चलकर जिंदगी को देखने का नजरिया बन गई।
डोभाल ने कहा कि शेरपा ने उनसे पूछा कि वह इतने परेशान क्यों हैं। डोभाल ने अपनी परेशानी बताई। इस पर शेरपा ने कहा कि यह सब ‘मैप-रीडिंग’ का मामला है।
शेरपा ने तीन सीधी बातें बताईं। पहली – आपको पता होना चाहिए कि आप अभी कहाँ खड़े हैं। दूसरी – यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपको जाना कहाँ है। तीसरी – वहाँ पहुँचने का रास्ता पता होना चाहिए।
डोभाल ने बताया कि यह बात उनके साथ रह गई। जिंदगी को देखने का तरीका बन गई ये सीख दीक्षांत समारोह में मौजूद छात्रों को यह किस्सा सुनाते हुए डोभाल ने इसी सीख को जिंदगी से जोड़ दिया।
उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर किसी भी करियर का हिस्सा हो सकता है। ऐसे समय में यह समझना जरूरी है कि आप कहाँ हैं, आपका लक्ष्य क्या है, और वहाँ तक पहुँचने का रास्ता कौन सा है।
उनकी बात का मतलब सीधा था। किसी एक खराब दौर को पूरी जिंदगी का नतीजा मानना सही नहीं है। हालात बदल सकते हैं। दिशा भी बदली जा सकती है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि उस समय अपनी स्थिति को ठीक से समझा जाए।
यह घटना उनके लिए बड़ा झटका थी। उन्हें लगा था कि अब सब खत्म हो गया। उन्हें लगता था कि अब उन्हें कोई दूसरा करियर शुरू करना पड़ेगा।
लेकिन जांच का नतीजा उनके पक्ष में आया। जांच टीम ने पाया कि उनकी टीम को मुख्यालय से जो नक्शे और स्केच दिए गए थे, उनमें गलतियां थीं। इसलिए डोभाल को जिम्मेदार नहीं माना गया।
हालांकि उनकी सीधी गलती नहीं थी, फिर भी उस पूरे अनुभव ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान किया। उन्होंने कहा कि उस समय वह बहुत दुखी था।
शेरपा ने डोभाल को तीन सीधी बातें सिखाईं। पहली – आपको पता होना चाहिए कि आप अभी कहाँ खड़े हैं। दूसरी – यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपको जाना कहाँ है। तीसरी – वहाँ पहुँचने का रास्ता पता होना चाहिए।
डोभाल ने बताया कि यह बात उनके साथ रह गई। यह सीख दीक्षांत समारोह में छात्रों को जिंदगी से जोड़ने का एक अच्छा तरीका बन गई।
अब यह किस्सा यह दर्शाता है कि रास्ते में रुकावट आए तो पहले यह देखिए कि आप कहाँ खड़े हैं, जाना कहाँ है, और फिर रास्ता चुनें।
