हूतियों ने बनाईं 20 किलोमीटर लंबी सैन्य किलेबंदी, बाब-अल-मंदेब समुद्री रास्ता निगरानी का टार्गेट

राहुल शर्मा
4 Min Read
Rate this post

यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब खाड़ी के पास लगभग 20 किलोमीटर लंबी किलेबंदी बनाई है। ये हूतियों की 20 किलोमीटर किलेबंदी सऊदी समर्थित सेना के खिलाफ डिफेंस और शिपिंग रूट की निगरानी के लिए तैयार की गई है।

दुबाब और पेरिम द्वीप के ऊंचे पहाड़ों पर खोदी गई ये खाईयां और मिट्टी के तख्तिए सईद अल-मंदेब की रणनीति महत्वपूर्ण बिंदु पर कब्जा करने की कोशिश है। सेंटिनल-2 उपग्रह की तस्वीरों में 8 से 16 सितंबर के बीच ये बदलाव साफ दिखाई दिए। लाल घेरे के अंदर सफेद लाइनें ही खुली सुरंगें हैं।

बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यूरोप, एशिया तथा अफ्रीका के बीच तेल और व्यापारिक जहाजों का मुख्य मार्ग है। दुनिया का 10 प्रतिशत समुद्री व्यापार और बड़े पैमाने पर तेल का आना-जाना इसी पतले समुद्री रास्ते से होता है। इसलिए यहां कोई भी सैन्य गतिविधि सीधे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।

हूती लड़ाकों ने कुछ दिन पहले मुराद तट पर फिल्माए गए बयान में कहा था कि वे खाड़ी के पास मजबूत रक्षा व्यवस्था तैयार करेंगे। छह दिन बाद ही ये खाईयां सैटेलाइट पर नजर आने लगीं। यह तेजी से किया गया काम दिखाता है कि समूह संभावित हमले के लिए तैयारियां तेज कर रहा है।

ट्रेंच और खंगर बनाने का मकसद मुख्य रूप से दो उद्देश्यों से है। पहला, सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकार की सेनाओं के खिलाफ रक्षात्मक दीवार खड़ी करना। हाल ही में हूतियों ने लाल सागर तट के कुछ इलाकों पर कब्जा किया था। अब सऊदी समर्थित बल उन इलाकों को वापस लेने की कोशिश कर सकते हैं। ऊंची जमीन पर बनी ये खाईयां टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों के खिलाफ एंटी-टैंक मिसाइलों के इस्तेमाल के लिए बेहद अनुकूल हैं। ऊंचाई से नीचे की तरफ फायर करना आसान होता है और दुश्मन की गाड़ियों को रोकना संभव हो जाता है।

दूसरा उद्देश्य जहाजी मार्गों पर लगातार नजर रखना है। इन ऊंचे स्थानों से समुद्री लेन साफ दिखाई देती हैं, जिससे हूती बल किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रख सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऊंची जमीन पर ऐसी किलेबंदी रक्षात्मक युद्ध के लिए बहुत उपयोगी होती है। खाईयां न सिर्फ सैनिकों को सुरक्षा देती हैं बल्कि लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता भी बढ़ाती हैं।

पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे बीमा लागत बढ़ी और कुछ कंपनियों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने शुरू कर दिए। अगर हूती बल इन पदों से जहाजों की आवाजाही पर दबाव बनाए रखते हैं तो तेल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखला में देरी आ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देश, इस खाड़ी की सुरक्षा को लेकर पहले से चिंतित हैं।

यह घटना यमन के लंबे गृहयुद्ध का हिस्सा है, जिसमें हूती बल ईरान के करीबी माने जाते हैं जबकि सऊदी अरब और उसके सहयोगी खड़े हैं। क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों के लिए यह घटना गहरी निगरानी की मांग करती है। आने वाले हफ्तों में सैटेलाइट तस्वीरें और जमीनी रिपोर्ट्स बताएंगी कि यह तैयारी कितनी प्रभावी साबित होती है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *