अरब सागर में भारत-पाक नौसेना टकराव: पाक उच्चायोग तलब, 1991 समझौते के उल्लंघन पर कड़ा विरोध

राहुल शर्मा
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16 सितंबर 2026

अरब सागर में भारत-पाक नौसेना टकराव: पाक उच्चायोग तलब, 1991 समझौते के उल्लंघन पर कड़ा विरोध

भारत पाकिस्तान नौसेना टकराव की एक नई घटना सामने आई है। उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज ने भारतीय युद्धपोत से टक्कर मार दी। इसके बाद भारत ने तुरंत कड़ा विरोध दर्ज कराया और पाकिस्तान के चार्ज द अफेयर्स को विदेश मंत्रालय में बुलाया।

मंगलवार शाम उत्तरी अरब सागर में यह गंभीर घटना घटी। भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था। तभी एक पाकिस्तानी जहाज बहुत तेज रफ्तार से और असुरक्षित तरीके से उसके करीब आ गया। इससे दोनों जहाजों के बीच सीधी टक्कर हो गई।

इस दौरान कोई बड़ा नुकसान या क्षति नहीं हुई। हालांकि, भारत ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया। भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के वॉरशिप आमने-सामने टक्कर हो गई थी।

अगले दिन 16 सितंबर को नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के चार्ज द अफेयर्स को विदेश मंत्रालय बुलाया गया। उनसे पाकिस्तानी नौसेना इकाइयों के अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

भारत का कहना है कि यह व्यवहार दोनों देशों के बीच अप्रैल 1991 में हुए समझौते का सीधा उल्लंघन है। उस समझौते की धारा 10 में सैन्य अभ्यास और मैन्यूवर के दौरान सावधानी बरतने और नियमों का पालन करने की बात कही गई है। पाकिस्तानी जहाज के आचरण को भारत ने इसी धारा के खिलाफ बताया।

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के चार्ज द अफेयर्स को सलाह दी कि वे संबंधित अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाएं। सभी सैन्य इकाइयों को सावधानी बरतनी चाहिए और दोनों पक्षों के समझौतों का सम्मान करना चाहिए। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

भारत ने सिर्फ दिल्ली में ही विरोध नहीं जताया। इस्लामाबाद में भारत के चार्ज द अफेयर्स को भी निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में भी इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का आदेश दिया है। यह कदम दिखाता है कि भारत इस मुद्दे को द्विपक्षीय स्तर पर उठा रहा है।

समुद्र में नौसेना जहाजों की टक्कर छोटी घटना लग सकती है। लेकिन यह सैन्य अनुशासन और समझौतों के पालन का बड़ा सवाल उठाती है। अंतरराष्ट्रीय जल में होने के बावजूद भारत ने इसे नजरअंदाज नहीं किया। विरोध दर्ज कराने का मकसद भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोकना है।

दोनों देश कई समझौतों से बंधे हैं जो अचानक तनाव बढ़ने से बचाते हैं। इनका उल्लंघन होने पर तुरंत राजनयिक प्रतिक्रिया आना आम बात है। भारत की ओर से साफ संदेश है कि सैन्य इकाइयों को नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

पाकिस्तान की ओर से अभी कोई आधिकारिक जवाब सार्वजनिक नहीं आया है। ऐसे मुद्दे आमतौर पर चुपचाप निपटाए जाते हैं। लेकिन इन्हें दर्ज कराना दोनों पक्षों के लिए रिकॉर्ड रखने का तरीका है। कुल मिलाकर यह घटना भारत-पाकिस्तान संबंधों में समुद्री इलाकों में सावधानी की जरूरत को फिर रेखांकित करती है।

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