ब्रिक्स समिट दिल्ली 2026: पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हो रहे कूटनीतिक संवाद में दो चेहरे लगातार मुस्कुराते नजर आए हैं। ये दोनों कोई सामान्य अधिकारी नहीं, बल्कि दोनों नेताओं के सबसे भरोसेमंद अनुवादक हैं। ब्रिक्स समिट दिल्ली अनुवादक सन निंग सिद्धार्थ बाबू इस बार फिर से सुर्खियों में आए हैं।
पीएम मोदी के बगल में खड़े इस अधिकारी का नाम सिद्धार्थ बाबू है। वहीं राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ मुस्कुराते दिखे चीनी अनुवादक का नाम सन निंग है। दोनों ही अपने-अपने नेताओं के साथ हर बड़ी बैठक और दौरे में शामिल रहते हैं।
सन निंग 1981 में नानजिंग में जन्मे। उन्होंने नानजिंग फॉरेन लैंग्वेज स्कूल और बीजिंग फॉरेन स्टडीज़ यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में दक्षता हासिल की। साथ ही उन्होंने यूके में भी पढ़ाई की। अगस्त 2003 में उन्होंने चीनी विदेश मंत्रालय के अनुवाद विभाग में काम करना शुरू किया।
चीन के अखबार पीपुल्स डेली के मुताबिक सन निंग ने हाई स्कूल में इंग्लिश कॉम्पिटिशन जीती थी। कॉलेज में स्पीच कॉम्पिटिशन में उनके प्रदर्शन ने विदेश मंत्रालय का ध्यान खींचा। यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट होने से पहले ही विदेश मंत्रालय ने उनसे संपर्क किया और रुककर काम करने का प्रस्ताव दिया।
विदेश मंत्रालय में अनुवादक बनना बेहद मुश्किल है। इसके लिए कई दौर के मूल्यांकन होते हैं। सन निंग की सबसे बड़ी खूबियां उनका व्यापक ज्ञान, दोनों भाषाओं पर मजबूत पकड़, शांत स्वभाव और सरल प्रकृति हैं।
सन निंग ने चीन के पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियां की प्रेस कॉन्फ्रेंस का अनुवाद करते हुए काफी ख्याति अर्जित की। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पद संभालने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा में उनका चेहरा पहली बार टीवी पर दिखा। फरवरी 2012 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जिनपिंग की अमेरिका यात्रा में भी सन निंग उनके साथ रहे।
अब देखते हैं पीएम मोदी के अनुवादक सिद्धार्थ बाबू कौन हैं। सिद्धार्थ बाबू केरल के कोच्चि से हैं। वह 2017 बatch के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं। विदेश मंत्रालय में कार्यरत सिद्धार्थ बाबू कई भाषाओं में निपुण हैं, विशेषकर मंदारिन और अंग्रेजी।
पिछले वर्षों से वे प्रधानमंत्री मोदी के साथ उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में इंटरप्रेटर के रूप में दिखते आए हैं। जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ भी उन्होंने यही भूमिका निभाई थी।
सिद्धार्थ बाबू ने अमेरिका के प्रतिष्ठित मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, मोंटेरे से भाषा की पढ़ाई की है। यहां न सिर्फ भाषा सिखाई जाती है, बल्कि अफसरों को कूटनीति और डिप्लोमेसी के गुर भी सिखाए जाते हैं।
सिद्धार्थ बाबू ने कभी कहा था, “एक डिप्लोमैट के तौर पर, हम कल्चर के बीच पुल का काम करते हैं। अगर आप किसी भाषा की बारीकियों को नहीं समझते, तो सच में यह नहीं समझ पाते कि सामने वाला क्या कहना चाहता है।”
ब्रिक्स समिट दिल्ली अनुवादक सन निंग सिद्धार्थ बाबू इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उच्च-स्तरीय कूटनीति में सही अनुवाद बहुत संवेदनशील होता है। एक छोटी सी गलती भी गलतफहमी पैदा कर सकती है। इसलिए दोनों देशों के नेता सबसे अनुभवी और भरोसेमंद अनुवादकों को ही अपने साथ रखते हैं।
सन निंग और सिद्धार्थ बाबू न सिर्फ भाषा के पुल हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच संवाद को सहज बनाने वाले चुपचाप काम करने वाले कूटनीतिक स्तंभ भी हैं।
