रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं. वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे.
इस मुलाकात में रक्षा सहयोग सबसे अहम मुद्दा रहने की उम्मीद है. दोनों देश लंबे समय से चल रहे सैन्य संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे.
चर्चा के केंद्र में चार प्रमुख हथियार हैं – S-400 मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल, Su-30MKI का सुपर सुखोई अपग्रेड और पांचवीं पीढ़ी का Su-57E लड़ाकू विमान.
S-400 मिसाइल सिस्टम की पांचवीं खेप की समयबद्ध डिलीवरी और रखरखाव पर बात होगी. भारत ने 2018 में पांच S-400 सिस्टम खरीदने का समझौता किया था, जिनमें से चार पहले ही तैनात हैं.
पुतिन ने भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सुविधा लगाने का भी प्रस्ताव रखा है. साथ ही भारत अतिरिक्त पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीदने पर विचार कर रहा है, जिसकी कीमत करीब 50 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है.
ब्रह्मोस-एनजी पर भी चर्चा होगी. यह मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की और लंबी दूरी वाली मिसाइल है, जिसका वजन लगभग 1.3 टन और रेंज 400 किलोमीटर से अधिक है. दोनों देश इसके संयुक्त उत्पादन और अपग्रेड पर सहमति बना सकते हैं.
Su-30MKI फाइटर जेट को सुपर सुखोई कॉन्फिगरेशन में अपग्रेड करने की योजना पर भी बात होगी. इसमें नए रडार, बेहतर एवियोनिक्स और आधुनिक हथियार सिस्टम शामिल होंगे. इस अपग्रेड की लागत 11 अरब डॉलर से अधिक बताई जा रही है.
Su-57E पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है. रूस ने भारत को इस विमान का निर्यात versie बेचने, संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया है. अगर यह डील होती है तो भारत के स्टील्थ गैप को भरने में मदद मिलेगी.
ये सभी चर्चाएं पुतिन भारत रक्षा डील के तहत हो रही हैं. उनका मकसद भारत की सैन्य क्षमता को आधुनिक खतरों के अनुसार मजबूत करना है.
मोदी और पुतिन की बैठक से जो दिशा तय होगी, उसके आधार पर आने वाले महीनों में इन प्रोजेक्ट्स पर प्रगति देखी जा सकती है. ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान यह मुलाकात केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है.
