पाकिस्तान क्रिकेट टीम पिछले तीन साल से लगातार गिरावट का सामना कर रही है। कप्तान, कोच और सेलेक्शन कमेटी में लगातार बदलाव हो रहे हैं। हालिया इंग्लैंड दौरे के बीच सात सीनियर खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर दिया गया है। साथ ही हेड कोच सरफराज अहमद और बॉलिंग कोच उमर गुल की भी छुट्टी हो गई है। उनकी जगह माइक हेसन को टेस्ट टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीम में पांच अनकैप्ड खिलाड़ियों को शामिल किया गया है जो अब तक बहुत कम अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखते हैं। यह सब कुछ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के निर्देशों पर हो रहा है। कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ बोर्ड के अस्थिर रवैये को टीम के पतन की मुख्य वजह मानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि निर्णयों में पारदर्शिता की कमी और राजनीतिक हस्तक्षेप देखे जा रहे हैं। बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान जैसे स्टार खिलाड़ियों की कप्तानी भी बार‑बार बदली गई है। इससे टीम में स्थिरता नहीं आई और प्रदर्शन लगातार गिरता गया। पिछले कुछ टूर्नामेंट में पाकिस्तान टीम ग्रुप स्टेज से भी आगे नहीं बढ़ सकी है। विशेषकर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में टीम सबसे नीचे के स्थान पर है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर पीसीबी में स्थिरता और विशेषज्ञों की भागीदारी नहीं लाई गई तो स्थिति सुधरने की संभावना कम है। फिलहाल टीम युवा और अनुभवहीन खिलाड़ियों पर निर्भर है जिसका भविष्य अनिश्चित दिखाई दे रहा है।
