राहुल शर्मा
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अमेरिका के दो सबसे करीबी सहयोगी इजरायल और तुर्की के बीच पिछले सालों में तनाव लगातार बढ़ा है। गाजा युद्ध, सीरिया में प्रभाव और पूर्वी भूमध्य सागर में ऊर्जा संसाधनों पर विवाद ने दोनों देशों के रिश्तों में दूरी बढ़ा दी है। अब यह सवाल खुला है कि क्या ये दोनों देश कभी सीधे युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं, और अगर हां तो कौन जीतेगा?

ग्लोबल फायरपावर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की विश्व में 9वें और इजरायल 15वें स्थान पर है। इस रैंकिंग में देशों की जनसंख्या, हथियारों की संख्या, रक्षा बजट और भूगोल जैसे 60 से ज्यादा कारकों पर गणना की जाती है। संख्या के हिसाब से तुर्की आगे है, लेकिन इजरायल की ताकत गुणवत्ता, तकनीक और युद्ध के अनुभव में छिपी है।

तुर्की की जनसंख्या लगभग 8.5 करोड़ है, जबकि इजरायल की आबादी महज एक करोड़ है। तुर्की की सेना में 3.55 से 4.81 लाख जवान हैं और रिजर्व बल करीब 3.78 लाख हैं। इजरायल की सक्रिय सेना 1.70 लाख है, लेकिन उसका रिजर्व सिस्टम बेहद मजबूत है। युद्ध की स्थिति में लगभग 4.65 लाख रिजर्विस्ट कुछ दिनों में तैयार हो सकते हैं। इजरायल का पूरा समाज सैन्य सेवा से जुड़ा हुआ है, जिससे यह तेजी से जुटाव कर सकता है। लंबे युद्ध में तुर्की को जनसंख्या का फायदा मिल सकता है।

जमीनी बलों में तुर्की स्पष्ट रूप से संख्या में आगे है। तुर्की के पास करीब 2200 से 2284 मुख्य युद्धक टैंक हैं, जिनमें लेपर्ड 2ए4, अपग्रेडेड एम60 और देशी अल्ताय टैंक शामिल हैं। इसके अलावा 13,000 से ज्यादा अन्य वाहन हैं। इजरायल के पास मुख्य टैंकों की संख्या करीब 400 है, लेकिन ये मर्कावा एमके4 दुनिया के सबसे सुरक्षित टैंकों में गिने जाते हैं। इन पर एंटी-टैंक मिसाइलों को रोकने वाला ट्रॉफी सिस्टम लगा है। इजरायल की जमीनी सेना शहरी युद्ध और सटीक हमले में बेहद कुशल है, जबकि तुर्की बड़े क्षेत्र पर कब्जा करने वाले युद्ध में अच्छी ताकत रखती है।

हवाई ताकत में इजरायल की तकनीकी बढ़त सामने है। तुर्की के पास कुल 1067 से 1101 विमान हैं, जिनमें 299 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं, ज्यादातर F-16 हैं। तुर्की ने हाल के सालों में ड्रोन टेक्नोलॉजी में बड़ी प्रगति की है, बेरक्तार टीबी2 और अकिंसी जैसे ड्रोन दुनिया भर में चर्चा में हैं। वहीं, इजरायल के पास 534 विमान हैं, जिनमें 284 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं, जिसमें आधुनिक एफ-35आई आदिर स्टेल्थ फाइटर जेट शामिल हैं। इजरायल की वायु सेना इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, खुफिया जानकारी और सटीक हमलों में अग्रणी है। शुरुआती दिनों में इजरायल की हवाई बराबरी तुर्की के लिए मुश्किल साबित हो सकती है।

समुद्री ताकत में तुर्की को स्पष्ट बढ़त है। तुर्की के पास 195 से 217 युद्धपोत हैं, जिनमें 12 से 13 पनडुब्बियां हैं। तुर्की अपनी नौसेना को मावी वतन रणनीति के तहत पूर्वी भूमध्य सागर और काला सागर में प्रभाव बढ़ाने पर काम कर रही है। इजरायल की नौसेना छोटी है, जिसमें 52 से 55 जहाज और 5 से 6 पनडुब्बियां हैं, ज्यादातर तटीय सुरक्षा पर केंद्रित हैं। लेकिन इजरायल की डॉल्फिन क्लास पनडुब्बियां परमाणु हथियार वहन कर सकती हैं, जो रणनीतिक महत्व रखती हैं।

रक्षा बजट और तकनीकी क्षमता में भी अंतर है। इजरायल अपने जीडीपी का बड़ा हिस्सा सेना पर खर्च करता है, जबकि तुर्की अपनी रक्षा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने में जुटा है। सबसे बड़ा अंतर परमाणु हथियारों का है। इजरायल के पास अनुमानित 90 परमाणु हथियार हो सकते हैं, जबकि तुर्की के पास कोई परमाणु नहीं है। यह रणनीतिक संतुलन को बाधित करता है। इजरायल की ताकत उसकी एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स, साइबर क्षमता और अमेरिका से मिलने वाले हथियारों पर निर्भर करती है।

तो, क्या दोनों देश सीधे युद्ध की ओर बढ़ेंगे? ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि सीधे युद्ध की संभावना बहुत कम है। दोनों अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में जुड़े हुए हैं। एक बड़ा युद्ध क्षेत्रीय स्थिरति को तोड़ सकता है, जिसमें अमेरिका और अन्य शक्तियां दखल देंगी। वर्तमान में इजरायल गाजा और ईरान के खतरों से व्यस्त है, जबकि तुर्की सीरिया और कुर्द मुद्दों पर फोकस कर रही है। तनाव बना रह सकता है, लेकिन पूरे पैमाने का युद्ध दोनों के हित में नहीं होगा।

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