ज़ाइल: जब रांची में सड़कों पर छात्रों ने राष्ट्रगान गाया, तो पुलिस लाठीचार्ज के बीच इतनी ऊर्जा रखी थी कि सड़क की साँसें कम हो उठीं। साल से चल रहे झारखंड छात्र आंदोलन में अब इस बार विधानसभा घेराव का निर्णायक दौर आ गया है। वे आर्थिक अन्याय की बात करके अपनी मांगें जारी कर रहे हैं। यह छात्रों का हिसाब है कि मुख्यमंत्री सोनू के जवाब जाने के बाद तब तक वहाँ मरांडी किया जाएगा।
जब रांची के छात्रों ने सीएम सोरेन से मुलाकात की, तो उन्होंने कहा था कि जब तक मांगें सामने नहीं आएंगी, वहीं प्रदर्शन जारी रहेगा। यह आंदोलन एक दिन के लिए ही नहीं, बल्कि कई दिनों तक चलेगा। छात्रों ने मांगा कि सीबीआई जाँच को पूरा करके एक शांतिपूर्ण मंच से वहाँ प्रदर्शन कराना होगा। वे तकनीकी परीक्षा और नीति कानून में सुधार की मांग कर रहे हैं।
पुलिस ने विधानसभा घेराव में बैरिकेड जारी कर दी है। छात्रों ने नहीं कहा कि वे सरकार के खिलाफ लड़ेंगे, बल्कि नीति संहिता का भरोसा करते हुए चलेंगे। 10 अगस्त तक बहुत सर्वाइवल का दौर चलेगा और छात्रों में अतिरिक्त तनाव बना रहेगा।
बीजेपी ने जवाब दिया कि वे यहाँ पर छात्रों की अन्याय की बात नहीं कर रहे, बल्कि पुलिसिया की ज़मानदारी के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रदेश के नेता अधिकारों के उल्लंघन पर राज्य सरकार को जवाब देने को मजबूर है। छात्रों की मांगों पर धीरे-धीरे बल दिया जा रहा है, लेकिन सरकार उनकी हिमात्मा को दबा रही है।
एक दिन पुलिस की दौड़ में अनुभव हो गया और सड़कों पर गर्मी बनी है। पुलिस के हाथों में शोर था, लेकिन छात्रों ने अपनी दृढ़ता से बताया कि यह मजबूरी नहीं है। राष्ट्रगान बजाकर वे अपनी शक्ति दिखा रहे हैं। छात्रों ने कहा कि लाठी और पानी से डरने वाले नहीं, दृढ़ता से दृढ़।
विधानसभा घेराव के बाद यह घटना राज्य सरकार और जनता के बीच का पहला मज़बूरी रिश्ता साबित हुआ। छात्रों ने जो मांग की है, उसे अधिकारियों को भी सामने रखा गया है। कंपनियों के वित्तीय परीक्षण और नीति प्रणाली में सुधार की मांग है। यह मुक्ति उन्हें घेराव से ज्यादा थोड़ा होगा।
