भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। गगनयान जैसे बेहद महत्वपूर्ण और देश के गौरव से जुड़े मिशनों को सफल बनाने के लिए सरकार ने एक सख्त फैसला लिया है। अंतरिक्ष विभाग ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के इस्तीफे और VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) पर फिलहाल रोक रहेगी।
सरकार का यह कदम इसरो में बढ़ते ‘ब्रेन ड्रेन’ यानी टैलेंट के पलायन को रोकने की कोशिश है। हाल ही में जारी आदेश के मुताबिक, अब इसरो के केंद्रों को किसी भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक की इस्तीफे की अर्जी सीधे स्वीकार करने की अनुमति नहीं होगी। ऐसी कोई भी अर्जी मिलने पर उसे सीधे अंतरिक्ष विभाग भेजा जाएगा, जहाँ अंतिम फैसला लिया जाएगा। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि मिशनों पर काम कर रहे अनुभवी लोगों के जाने से देश के बड़े अंतरिक्ष अभियानों पर बुरा असर पड़ सकता है।
दरअसल, इसरो के सामने इस समय एक गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। कभी देश के सबसे होशियार युवाओं की पहली पसंद रहने वाला इसरो अब टैलेंट खो रहा है। वैज्ञानिकों के चले जाने के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। निजी स्पेस कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले आकर्षक सैलरी पैकेज, बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस, तेज प्रमोशन और काम करने के आधुनिक माहौल की वजह से युवा वैज्ञानिक बाहर के विकल्प तलाश रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ आदेश जारी कर वैज्ञानिकों को रोकना काफी नहीं होगा। गगनयान मिशन, जिसमें इंसान को अंतरिक्ष में भेजना है, उसमें बहुत बारीकी और अनुभव की जरूरत होती है। अगर इस मिशन से जुड़े माहिर लोग चले जाते हैं, तो तकनीक और मिशन की सफलता पर खतरा मंडरा सकता है।
इस समस्या का स्थायी समाधान तभी निकलेगा जब इसरो में काम करने का माहौल फिर से वैसा ही प्रेरणादायक बनाया जाए, जैसा विक्रम साराभाई के दौर में हुआ करता था। विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिकों को रोकने के लिए केवल नियम काफी नहीं हैं; बल्कि उन्हें बेहतर सुविधाएं, आसान प्रमोशन प्रक्रिया और रिसर्च के लिए अधिक संसाधन प्रदान करना जरूरी है। अगर भारत को 2040 तक अंतरिक्ष की महाशक्ति बनना है, तो इसरो को फिर से वैज्ञानिकों के लिए सपनों का केंद्र बनाना होगा।
