पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में वक्रवर्ती मार्च के बीच बेरहमी गोलीबारी कर बटुट किए मुजफ्फराबाद की सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज सुनाई दी. यह प्रदर्शन जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) की अगवाई में चला रहा है, जिसमें 38 सूत्री मांग-पत्र सौंपे गए हैं. इनमें सस्ती बिजली, गेहूं, रोजगार और शासन-व्यवस्था के सुधार की मांग है. सुबह शुरू हुए इस आंदोलन को लेकर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कई ज़िलों में हिंसक कार्रवाई की थी, जिसमें कम से कम 8 प्रदर्शनकारियों की मृत्यु और दर्जनों घायल हुए।
मंगलवार को मुजफ्फराबाद के रावलकोट बस स्टॉप पर आयोजित विशाल जन सभा के बाद से ही तनाव का माहौल था। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस छोड़ने वाले पहले ही गुबार में ही गोलियां चला दीं। जबकि महिलाओं और बच्चों को बचाकर भागने की स्थिति थी, तो कुछ घायल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा था। इसके बाद से ही PoK में इंटरनेट बंद करना, सड़कों को ब्लॉक करना और खाने-पीने की वस्तुओं की सप्लाई को रोकना शुरू कर दिया गया। JAAC के प्रमुख सरदार अमान खान ने सभा में कहा, “PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। यह एक कब्ज़े वाला इलाका है।”
अमान खान के बयान ने आंदोलन को और तेज़ कर दिया। उन्होंने कहा कि इस पर जबरदस्ती कब्ज़ा किया गया है और पाकिस्तान ने इस पेश आर्थिक शोषण और भेदभाव की थी। जन सभा में “पाकिस्तान से आज़ादी” और “पाकिस्तानी सेना बाहर जाओ” जैसे नारे गूंजे। JAAC के 600 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पाकिस्तान ने संगठन पर बैन लगा दिया है। इससे पहले भी पाकिस्तान ने PoK में गैर जमानती वारंट और हमलों में चलाने वाले ट्रायल जारी रखा है।
वायराल लगातार चल रहे 40 दिनों के आंदोलन के बाद आज का मार्च पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ खुले विद्रोह को दर्शाता है। मुजफ्फराबाद में भारी सुरक्षा बल तैनात करने के बावजूद लोग इसे छूटकर विरोध में उठे हुए हैं। पाकिस्तान जो बाहर से “कश्मीर मुद्दे” का हमदर्द बताता है, वही अपने कब्जे वाले इलाके में निहत्थे नागरिकों पर गोलियां बरसा रहा है। JAAC की मांगों को लेकर आज का मार्च प्रतीक्षित था, लेकिन गोलीबारी ने इसे और भी महत्व दिला दिया।
