होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान फिर आमने-सामने हैं. तनाव इस कदर बढ़ चुका है कि मध्य-पूर्व में महायुद्ध का खतरा मंडराने लगा है. पिछले तीन दिनों में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है. वहीं ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने कतर स्थित अल उदीद एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की बात कही है. इस एयरबेस पर लड़ाकू विमानों के मेंटेनेंस सेंटर और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया गया.
यह ताजा भड़काव एक कमर्शियल जहाज पर IRGC के हमले के बाद शुरू हुआ. ईरानी नौसेना का कहना है कि जहाज ने तय समुद्री मार्ग का पालन नहीं किया और अपने नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिए थे. चेतावनी के बाद भी रास्ता न बदलने पर उसे निशाना बनाया गया. इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर सिटी बुशहर समेत कई रणनीतिक शहरों पर हवाई हमले बोल दिए. अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से 800 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकलवाया है, जिनमें करीब 40 करोड़ बैरल तेल ले जा रहे टैंकर भी शामिल थे.
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक क्षेत्र में अमेरिकी दखल खत्म नहीं होता, होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा. IRGC ने ओमान के दुक्म पोर्ट और अमेरिकी विमानवाहक पोतों के लॉजिस्टिक सपोर्ट सेंटर पर भी बड़े हमले का दावा किया है. एक ईरानी सैनिक के मारे जाने की सूचना भी है. दोनों तरफ से हमलों का सिलसिला जारी है. परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, ये दो मुद्दे हैं जिन पर बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन पाई. अब हालात फिर बिगड़ चुके हैं. दुनिया के सामने तेल और गैस संकट का खतरा खड़ा हो गया है.
