ताज़ा केंद्रीय बजट 2026 से किसानों को बड़ी निराशा हाथ लगी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि सेक्टर के लिए महज 2.6% की बढ़ोतरी के साथ 1.30 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है। पिछले साल के बजट अनुमान 1.27 लाख करोड़ के मुकाबले यह बढ़ोतरी सिर्फ 3,000 करोड़ रुपये की है। अर्थव्यवस्था सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र की विकास दर में गिरावट का हवाला दिए जाने के बाद यह आवंटन विशेषज्ञों को नाकाफी लग रहा है।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय को पिछले साल से 8.5% ज्यादा 1.70 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। किसानों को सीधी आर्थिक मदद देने वाली किसान सम्मान निधि के लिए 63,500 करोड़ रुपये का ही बजट रखा गया है, इसमें कोई इजाफा नहीं किया गया। किसानों की बड़ी मांग एमएसपी को कानूनी गारंटी और कर्जमाफी पर बजट में कोई बात नहीं की गई। इससे देशभर के किसान संगठनों में गुस्सा है।
कृषि शोध और शिक्षा के बजट में करीब 5% की कटौती देखी गई है। इसके उलट खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के लिए 10% बढ़ाकर 2.35 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिसमें राशन सब्सिडी को 2.27 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। केंद्र सरकार ने कैश क्रॉप्स को बढ़ावा देने के लिए 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें नारियल, काजू, चंदन और अन्य मेवों की खेती के लिए सहायता दी जाएगी।
वहीं, सरकार ने किसानों को एआई तकनीक से जोड़ने के लिए 150 करोड़ रुपये के आवंटन का ऐलान किया है। एक मल्टीलिंगुअल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल बनाया जाएगा, जिसे ‘भारत-विस्तार’ नाम दिया गया है। यह सिस्टम एग्रीस्टैक पोर्टल्स और आईसीएआर की सुविधाओं को एकीकृत कर किसानों को बेहतर सलाह देगा।
देश के तमाम किसान संगठनों ने इस बजट को किसान-विरोधी बताया है। संघ परिवार से जुड़े भारतीय किसान संघ के महासचिव मोहनी मोहन शर्मा ने कहा कि सरकार ने किसानों के वादों पर अमल नहीं किया। पंजाब राज्य किसान और खेत मजदूर आयोग के प्रमुख डॉ. सुखपाल सिंह ने बजट में पंजाब के किसानों के लिए कुछ न होने पर निराशा जताई।
डॉ. सिंह ने बताया कि पंजाब में कपास की खेती घटकर महज एक लाख हेक्टेयर रह गई है। नौ कपास उत्पादक राज्यों में से आठ में किसानों के आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि बजट में कपास किसानों की दुर्दशा को संबोधित करने के लिए कुछ नहीं किया गया। किसानों की हालत पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को एमएसपी, कर्जमाफी और फसल विविधीकरण पर ठोस कदम उठाने चाहिए थे।
