भारत के विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की आज दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। इसमें चुनाव आयोग के सामने आने वाले मुद्दों और विपक्ष की साझा रणनीति पर चर्चा की उम्मीद है। कांग्रेश ने कहा है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग के व्यवहार और वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया (SIR) के खिलाफ एकताबद्ध रणनीति बनाना है। लेकिन इसके बीच विपक्षी एकता में अलग-अलग दलों के रुख सामने आ चुके हैं।
बैठक में कांग्रेश के अलावा तृणमूल कांग्रेश (TMC) की ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, PDP की महबूबा मुफ्ती और शिवसेना (UBT) के उद्धव ठाकरे भाग लेने वाले हैं। हालांकि, कुछ प्रमुख नेता बैठक से दूर रहने या ऑनलाइन भागीदारी करने का फैसला कर चुके हैं। समाजवादी पार्टी (SP) के अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं होंगे, जबकि उनकी जगह सपा के नेता हरेंद्र मलिक और मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी भागेंगे।
अखिलेश यादव के बैठक में अनुपस्थित रहने को लेकर सपा नेता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पार्टी इंडिया ब्लॉक और कांग्रेश के साथ गठबंधन को मजबूत मानती है। वहीं, शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने बताया कि उद्धव ठाकरे दोपहर 3 बजे के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि शरद पवार इंडिया ब्लॉक और महाविकास आघाड़ी के साथ बने रहेंगे।
आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रमुक (DMK) ने बैठक से दूरी बनाई है। AAP संसद सदस्य संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी पहले से साफ कर चुकी है कि वह इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। हालांकि, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ खड़े होने की बात कही। DMK ने भी बैठक में शामिल न होने का फैसला किया है, हालांकि उनकी वजह सामने नहीं आई है।
कांग्रेश की मुख्य मांगें महां आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना और SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकना है। पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को एक दिन भी अपने पद पर रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी सवाल उठाए, कहा कि चुनाव आयोग की कार्रवाई बिना शीर्ष नेतृत्व के समर्थन के बिना संभव नहीं थी।
इस बैठक के बाद आगे के आंदोलन और साझा योजना तैयार की जाएगी। कांग्रेश का आग्रह है कि सभी विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ एक साझा आवाज उठाएं। हालांकि, दराज और समुदायिक अंतर से बाहर रहने वाले दलों की भागीदारी के बिना इस एकता को मजबूत बनाना मुश्किल हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प रहेगा कि विपक्ष क्या साझा रणनीति बना पाता है या फिर अपने अंतरों को दोबारा दोहराता है।
