‘रात में आतंक फैलाते हैं…’ UN में शहबाज शरीफ के भाषण पर भारत का करारा जवाब
शिवानी शर्मा | नई दिल्ली, 26 सितंबर 2026 | अपडेटेड 26 सितंबर 2026, 8:54 AM IST
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण पर भारत ने तेज़ जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने भारतीय पक्ष की बात रखी। उन्होंने पाकिस्तान पर स्पष्ट निशाना साधते हुए कहा कि वहां का शासन ‘सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए’ है।
गहलोत ने कहा, ‘आज दोपहर महासभा में पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने कुछ अजीब टिप्पणियाँ कीं। यह ऐसे समय में हुआ है जब न्यूयॉर्क और दुनिया ने 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई है।’ उन्होंने यह भी बताया कि ओसामा बिन लादेन, जो 9/11 हमले के मास्टरमाइंड थे, पाकिस्तानी सेना की प्रमुख अकादमी के ठीक पास रह रहे थे।
पेटल गहलोत ने यह भी कहा कि आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने उसी संस्थान के सामने गहरी श्रद्धा जताई। विपक्षी दलों द्वारा प्रचलित ‘फॉर्म 47 सरकार’ शब्द का यह संदर्भ भी उन्होंने उठाया। यह शब्द उन पाकिस्तानी लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है जो मौजूदा सरकार को वैध नहीं मानते। फरवरी 2024 के चुनावों के बाद विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव परिणामों में हेरफेर किया गया था।
गहलोत ने पाकिस्तान की सरकारी व्यवस्था पर भी कड़ी टिप्पणी कही। उनका कहना है, ‘हमने एक ऐसे शासन की ओर से पाखंडी उपदेश सुने, जिसकी राजधानी इस समय अपने ही लोगों के खिलाफ कड़ी कड़ी सजा रही है। उनके कठपुतली आते-जाते रह सकते हैं, लेकिन हमें भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि फैसले कौन करता है।’ यहाँ तक कि पाकिस्तान का 27वाँ संशोधन और उसकी वास्तविक शक्ति का भी जिक्र हुआ।
आतंकवाद पर भी गहलोत ने स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘वे लोग दिन में सुरक्षा बनाए रखने का दावा करते हैं, जबकि रात में वास्तव में आतंकवाद को अंजाम देते हैं।’ यह कहानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मुद्देश्रेणी को और भी स्पष्ट करती है।
धार्मिक असहिष्णुता पर भी भारत ने कड़ा पलटवार किया। गहलोत ने कहा, ‘इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर ऐसी टिप्पणियाँ की गईं हैं जिनका मुख्य आधार ईशनिंदा कानून हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है, दुनिया जानती है।’ यह विषय विश्व स्तर पर चर्चा का बहुमुखी केंद्र बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी भारत ने अपनी जायज़ बात रखी। गहलोत ने कहा, ‘भारतीय संघ का केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर मेरे देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।’ फिर उन्होंने एक बड़ा सवाल उठाया। कहा, ‘अगर हमें कश्मीर की बात करनी है, तो आइए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की ओर ध्यान दें। रावलकोट के लोगों की लंबे समय से झेली जा रही मनमानी हत्याओं और बुनियादी अधिकारों से वंचिता के बारे में पूछिए।’
पूरे भाषण में पेटल गहलोत ने यह स्पष्ट किया कि भारत अपनी जायज़ बात किसी से डरकर नहीं कहेगा। आतंकवाद और अल्पसंख्यकों के प्रति दुर्व्यवहार जैसे मुद्दे भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बिना किसी हिचकिचाहे ऊंचे स्तर पर उठाए। यह भाषण अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की दृष्टिकोण को दर्शाता है।
