फ्रांस ने सऊदी अरब को मिलाए उसकी सबसे बड़ी सेन्य मदद के साथ यानबू की सुरक्षा के लिए तैयार हो रहा है। यूमेन के हूतियों के लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब ने अपने महत्वपूर्ण तेल केंद्र की सुरक्षा के लिए फ्रांस की सहायता अपनाई है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सऊदी अरब के अहम तेल केंद्र यानबू की सुरक्षा के लिए सैनिकों, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम भेजने का ऐलान कर चुके हैं। मैक्रों ने फ्रांसीसी टीवी चैनलों TF1 और France 2 को दिए इंटरव्यू में कहा कि फ्रांस यानबू में सुरक्षा और एयर डिफेंस को मजबूत करने के लिए अपने सैनिकों को भेजेगा।
यानबू सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह शहर लाल सागर में स्थित है और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के माध्यम से दुनिया के बाजारों तक तेल के प्रसार का मुख्य मार्ग है। हूतियों के हमलों के कारण यहां की सुरक्षा सीधे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव को बढ़ाती है।
पिछले कुछ महीनों में हूतियों ने यानबू पर बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों के हमले किए हैं, जिससे सऊदी की ऊर्जा ढांचे पर प्रतीक्षा का खतरा बन गया है। हूतियों का मतलब है कि वे सऊदी के तेल संयंत्रों को निशाना डालकर उसकी आर्थिक हिंसा और सेना की क्षमता को चुनौती देना चाहते हैं।
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच जो डवांडोल भूमिका है उससे भिड़ कर फ्रांस ने अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है। अमेरिका की ओर से सीधे सैन्य हस्तक्षेप के बावजूद, फ्रांस ने सऊदी के साथ गहरी रक्षा साझेदारी का विकल्प अपनाया है। मैक्रों ने कहा, “हम किसी टकराव में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि सऊदी के प्रमुख तेल केंद्र की सुरक्षा के लिए हम सैन्य मदद दे रहे हैं।”
