राहुल शर्मा
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तस्वीर अभी साफ नहीं है। दोनों दलों के नेता सार्वजनिक मंच से मिलकर लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, लेकिन सीट बंटवारे का फॉर्मूला अब तक तय नहीं हो पाया है। अखिलेश यादव कई बार कह चुके हैं कि कांग्रेस के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे। कांग्रेस आलाकमान भी मानता है कि सपा के अलावा कोई ठोस विकल्प नहीं है। बसपा प्रमुख मायावती पहले ही किसी गठबंधन से इनकार कर चुकी हैं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद अपने-अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं दिख रहे।

असल पेच सीटों के बंटवारे को लेकर फंसा है। कांग्रेस जल्द से जल्द सीट शेयरिंग फाइनल करना चाहती है ताकि उसकी बार्गेनिंग पावर बनी रहे। पार्टी के मुस्लिम चेहरे और सांसद इमरान मसूद अक्टूबर तक हर हाल में सीटों के नाम और संख्या तय कर लेना चाहते हैं। उनका कहना है कि देरी से जमीन पर नुकसान हो रहा है और कांग्रेस अपनी बढ़त खो देगी। वहीं समाजवादी पार्टी कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही। सपा का रुख साफ है कि पहले अपनी तैयारियां मुकम्मल कर लें, फिर सीटों पर बात होगी। अखिलेश यादव का दो टूक कहना है कि सीटों की संख्या नहीं, जीत की गारंटी मायने रखती है। जो जहां जीत सकता है, वहीं लड़ेगा।

दोनों तरफ से सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी के दावे किए जा रहे हैं, मगर हकीकत दोनों जानते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा कमजोर है तो बाकी प्रदेश में कांग्रेस का संगठन लगभग न के बराबर। एक-दूसरे की सियासी मजबूरी समझते हुए भी दोनों अपनी बार्गेनिंग पावर मजबूत रखकर मेज पर बैठना चाहते हैं। कांग्रेस का दावा है कि उसने डेढ़ सौ से ज्यादा सीटों की सूची सपा को सौंप दी है, लेकिन सपा की तरफ से बातचीत की कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जानकार मानते हैं कि औपचारिक बातचीत अभी शुरू ही नहीं हुई है। सपा इसे चुनाव की अधिसूचना तक खींचना चाहती है, जबकि कांग्रेस जल्द सब तय कर लेना चाहती है। ऐसे में शह-मात का खेल जारी है और गठबंधन की गांठ कब खुलेगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

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