देश भर के विश्वविद्यालयों में यूजीसी के नए नियमों को लेकर आक्रोश फैल गया है। सवर्ण समाज के छात्रों ने इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए 1 फरवरी को भारत बंद का ऐलान किया है। विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार बढ़ता जा रहा है।
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ भेदभाव रोकने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत इन वर्गों के छात्र शिकायत कर सकेंगे और संस्थानों को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। लेकिन सवर्ण छात्रों का आरोप है कि इन नियमों में उन्हें पहले से ही दोषी मान लिया गया है।
विरोध करने वालों का कहना है कि पुराने नियमों में गलत शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान था, जिसे नई गाइडलाइन से हटा दिया गया है। हालांकि यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि नियमों में किसी को सज़ा देने का प्रावधान नहीं है और आरोप गलत साबित होने पर अपील का अधिकार भी बना हुआ है।
इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी ने यूजीसी के नियमों का समर्थन करते हुए इसे ‘न्यायपूर्ण कदम’ बताया है। वहीं कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने इन्हें ‘पिछड़े वर्गों की आँखों में धूल झोंकने’ जैसा कहा है।
दूसरी ओर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी नियमों के खिलाफ याचिका दायर की गई है।
राजस्थान, बिहार और यूपी समेत कई राज्यों में छात्र संगठन सड़कों पर उतर चुके हैं। जयपुर, पटना और कानपुर में बड़े प्रदर्शन हुए हैं। करणी सेना ने 1 फरवरी को भारत बंद के साथ विधानसभा घेराव की भी चेतावनी दी है। स्थिति पर नज़र रखने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है।
