उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है. प्रदेश में तैनात 26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं. ये सभी डॉक्टर लंबे समय से ड्यूटी से गायब चल रहे थे या फिर अपनी चिकित्सीय ज़िम्मेदारियों को पूरा नहीं कर रहे थे. इसके अलावा 9 अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं.
यह कार्रवाई उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जो स्वास्थ्य विभाग की ज़िम्मेदारी भी संभालते हैं, के निर्देश के बाद अमल में लाई गई है. स्वास्थ्य विभाग ने पिछले कुछ महीनों से ऐसे मामलों की समीक्षा की थी, जिसके बाद यह फैसला सामने आया.
बर्खास्त किए गए डॉक्टरों में विशेषज्ञ चिकित्सक और मेडिकल ऑफिसर दोनों शामिल हैं. ये लोग प्रदेश के अलग-अलग जिलों के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात थे. जिन जिलों का ज़िक्र सामने आया है, उनमें लखनऊ, गोरखपुर, बरेली, मुरादाबाद, झांसी, मथुरा, अलीगढ़, फिरोज़ाबाद, गाज़ीपुर, हरदोई, महोबा, बुलंदशहर, बलरामपुर, मिर्ज़ापुर, सहारनपुर, चंदौली, मैनपुरी, मऊ, सुल्तानपुर और मुज़फ्फरनगर जैसे ज़िले शामिल हैं. यानी कार्रवाई किसी एक पद या एक ज़िले तक सीमित नहीं रही.
सरकार का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी सीधे मरीज़ों से जुड़ी होती है. जब डॉक्टर ही ड्यूटी पर नहीं आते, तो इलाज के लिए पहुंचने वाले लोगों को सबसे ज़्यादा परेशानी होती है. इसी वज़ह से ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया गया और समीक्षा के बाद यह सख्ती बरती गई.
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने साफ़ कहा है कि सरकारी अस्पतालों में तैनात हर डॉक्टर की पहली ज़िम्मेदारी मरीज़ों को समय पर और बेहतर इलाज देना है. जो लोग इस ज़िम्मेदारी को निभाने में चूक करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति की नियमित निगरानी की जाए और OPD व IPD सेवाओं पर भी पैनी नज़र रखी जाए.
वहीं, 9 अन्य डॉक्टरों के मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही के आरोप हैं. इनके खिलाफ उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के ज़रिए विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है. विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो नियमों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी. फ़िलहाल इन मामलों में विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और जाँच के आधार पर अगला फ़ैसला लिया जाएगा.
सरकार ने एक बार फ़िर साफ़ कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी. अस्पतालों में मरीज़ों को बेहतर इलाज मिले, यह सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी तरह की कोताही करने वालों पर कार्रवाई तय है.
