राफेल गिराने के दावे पर पाकिस्तान की बेइज्जती: एक्स-गार्ड डिकोय ने उड़ाई नींद

राहुल शर्मा
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पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई भारतीय फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया था।

यह दावा करने के बाद उसने जीत का जश्न भी मनाया।

लेकिन बाद में सामने आई जानकारियों ने सच्चाई उजागर की।

असल में पाकिस्तान जिसे राफेल समझे रहा था, वह सिर्फ एक डिकोय टार्गेट था।

इंडियन एयर फोर्स ने राफेल विमान पर X‑Guard नामक इलेक्ट्रॉनिक डिकोय लगाया हुआ था।

यह डिकोय इजरायली फाइबर‑ऑप्टिक टेक्नोलॉजी पर आधारित है।

रडार और मिसाइल सिस्टम इसे असली राफेल की तरह पहचानते हैं।

जब पाकिस्तानी रडार डिकोय पर फोकस करता है, तो मिसाइलें उसी पर जा गिरती हैं।

असली राफेल सुरक्षित रहता है, जबकि दुश्मन की मिसाइलें बेकार हो जाती हैं।

जेन्स डिफेंस वीकली ने इस घटना की जांच की और पाया कि कई ‘हिट’ वास्तव में डिकोय पर लगे थे।

केवल झूठी जीत का जश्न नहीं, बल्कि तकनीकी चालाकी ने इस घटना को उजागर किया।

एक्यू-गार्ड डिकोय करीब 30 किलोग्राम वजन का होता है और 100 मीटर लंबी केबल पर खींचा जाता है।

इसमें 500 वॉट का 360 डिग्री जैमिंग सिग्नल निकलता है, जो राफेल के रडार संकेत की नकल करता है।

डिकोय का संकेत लगातार बदलता रहता है, जिससे दुश्मन के सेंसर कन्फ्यूज होते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में यह तकनीक भारतीय राफेल को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई।

अधिकारियों का कहना है कि डिकोय ने कई मिसाइलें फेंकीं, जबकि असली जेट बिना क्षति के आगे बढ़ता रहा।

यह घटना दिखाती है कि आधुनिक हवाई लड़ाइयां सिर्फ गोलीबारी नहीं, बल्कि धोखा और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर भी हैं।

राफेल डिकोय विवाद ने साबित किया कि बिना प्रमाण के दावे झूठे हो सकते हैं।

भारत ने इस तकनीक से अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत किया है।

अब विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के डिकोय भविष्य में भी अहम रणनीति बनेंगे।

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