पाकिस्तान और बांग्लादेश पहले से ही भारत के खिलाफ एक साझा वॉटर डिप्लोमेसी का खेल चल रहे हैं। बांग्लादेश के वाटर रिसोर्सेज मिनिस्टर शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने गंगा जल संधि में गारंटी क्लॉज़ जोड़ने और तीस्ता का पानी देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत माने नहीं तो बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र तक जाएगा।
यह खबर पढ़ते ही एक सवाल उठता है कि क्या दोनों देशों ने एक साझा मोर्चा तैयार कर रहे हैं। पाकिस्तान ने पहले ही अप्रैल 2026 में सिंधु जल संधि के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गए थे। लेकिन उसे तवज्जो नहीं मिला। अब बांग्लादेश भी वैसी ही रणनीति अपना रहा है।
शाहिदुद्दीन ने 19 अगस्त को ढाका में एक सेमिनार में कहा कि गंगा जल संधि रिन्यू करने पर गारंटी क्लॉज़ शामिल करना चाहिए। 1977 की संधि में यह क्लॉज़ मौजूद था, लेकिन 1996 में शेख हसीना सरकार ने उसे हटा दिया। बांग्लादेश ने कहा कि बिना गारंटी क्लॉज़ के संधि में आगे का कोई रास्ता नहीं है।
मंत्री ने बताया कि बांग्लादेश तीस्ता के मुद्दे पर भारत से रिश्ते खराब नहीं करना चाहता। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत पड़े तो लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग किया जाएगा। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान इस मुद्दे को यूएन में उठाने वाले हैं।
गारंटी क्लॉज़ का मतलब है कि सूखे मौसम में अगर फरक्का बराज पर पानी बहुत कम हो जाए, तो भी बांग्लादेश को न्यूनतम मात्रा में पानी मिलता रहे। 1996 की संधि के अनुसार, जब पानी की मात्रा 70 हज़ार क्यूसेक से कम होती है, तो दोनों देशों में समान बंटवारा होता है। सबसे संवेदनशील समय 11 मार्च से 10 मई के बीच माना जाता है।
बांग्लादेश ने जून 2025 में संयुक्त राष्ट्र के वाटर कन्वेंशन का सदस्य बना है। यह एक तकनीकी और सहयोगात्मक मंच है जहां सदस्य देशों को संस्थाएं और वित्तीय सहायता मिलती है। भारत इसका सदस्य नहीं है, इसलिए इसका कोई बाध्यकारी असर नहीं होता। लेकिन बांग्लादेश इसे अपनी मांग को अंतरराष्ट्रीय कानून के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।
पहले ही पाकिस्तान ने वही किया था। इस्लामाबाद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सिंधु जल संधि के मुद्दे को राष्ट्रीय शांति का खतरा बताया था। लेकिन उसे कोई खास तवज्जो नहीं मिला। अब बांग्लादेश भी एक जैसी रणनीति अपना रहा है।
यह देख कर समझा जाता है कि दोनों पड़ोसी देशों की भाषा और रणनीति में साफ समानता दिख रही है। यह भारत के लिए सतर्क रहने वाली स्थिति बन गई है। क्या भारत को इन दोनों देशों के सामने एक नई वॉटर डिप्लोमेसी का सामना करना पड़ेगा?
अगले महीने में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को मजबूती से उठाने वाले हैं। इस कारण भारत को भी इस वॉटर डिप्लोमेसी के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
