प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर विपक्ष ने तीव्र प्रतिक्रिया दी
< p>आज के स्वतंत्रता दिवस के मंच पर प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण के बारे में अपनी बात कही। लेकिन इसके बाद विपक्ष ने इसे गंभीर रूप से चुनौती दी। कांग्रेस और कई दलों ने इस बयान को राजनीतिक हमले के रूप में प्रस्तुत किया। p>
< p>विपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मंच का उपयोग वास्तविक राजनीति के लिए नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को इस अवसर पर अपनी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करनी चाहिए, न कि किसी विशेष मुद्दे पर। p>
< p>बीजेपी नेताओं ने इसे एक अलग दृष्टिकोण से देखा। प्रधानमंत्री के संबोधन को विकसित भारत के लक्ष्यों को हासिल करने का रोडमैप बताया गया। बीजेपी के समर्थकों ने कहा कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। p>
< p>विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री की ‘मास्टर अब्यूजर’ डिग्री का उल्लेख किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री पर कांग्रेस के कामों का श्रेय लेने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने X पर लिखा कि प्रधानमंत्री पहले ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे, अब ‘दिमागी नक्सल’। p>
< p>CPI(M) महासचिव एम ए बेबी ने इस टिप्पणी को गंभीर आरोप माना। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन के बजाय मौजूदा सीटों पर लागू किया जाना चाहिए। CPI महासचिव डी राजा ने भी प्रधानमंत्री के इस बयान की असहमति व्यक्त की। p>
< p>विपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय अवसर पर असहमति जताने वालों को निशाना बनाया। TMC नेता साकेत गोखले ने भी इसे आलोचना के रूप में प्रस्तुत किया। p>
< p>बीजेपी ने अपने पक्ष में कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिनों पर भी राजनीतिक टिप्पणी करना उचित नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने लगातार 13वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग की। p>
< p>समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लाल किले से झूठ नहीं बोलने की बात कही। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की मांग की। p>
< p>इस घटना के बाद कई मीडिया चैनलों ने इस पर रिपोर्ट की। अजतक ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की और X पर विभिन्न लेखों के माध्यम से इस पर चर्चा हुई। p>
