पश्चिम बंगाल से तीन बागी मुस्लिम सांसदों ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे को उठाया। उन्होंने सवाल किया कि मस्जिद में अजान नहीं तो क्या होगा, जिससे उनकी चिंता साफ झलकती है।
मुलाकात में बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान, मुर्शिदाबाद से अबु ताहिर खान और जांगीपुर से खलिलुर रहमान शामिल थे। ये सभी सांसद तृणमूल कांग्रेस छोड़कर Nationalist Citizens Party of India (NCPI) बनाकर एनडीए के करीब आए थे, लेकिन अब वे एनडीए या भाजपा में शामिल होने से साफ़ इनकार कर रहे हैं।
सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करते हैं, लेकिन मस्जिदों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर एकतरफा तरीके से हटाना सही नहीं है। उन्होंने गृह मंत्री से आग्रह किया कि नियमों का पालन निष्पक्ष और संवेदनशील ढंग से किया जाए, ताकि किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
तीनों ने कहा कि उनका पहला दायित्व मतदाताओं के प्रति है। वे ऐसा कोई कदम समर्थन नहीं करेंगे जो मुसलमानों के खिलाफ हो। एनडीए की बैठक में शामिल न होने का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि कुछ मतदाताओं ने उनकी भाजपा के करीब होने पर सवाल उठाए थे और वे वोटर बैकलैश से बचना चाहते हैं।
मुलाकात के दौरान सांसदों ने अमित शाह को एक पत्र भी सौंपा। पत्र में बताया गया कि स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने इन कार्रवाइयों की समीक्षा और हस्तक्षेप की मांग की।
बहरामपुर, मुर्शिदाबाद और जांगीपुर पश्चिम बंगाल के मुस्लिम‑बहुल जिले में स्थित हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार पूरे मुर्शिदाबाद जिले में मुस्लिम आबादी लगभग 66‑67 प्रतिशत है, जिससे इन सीटों का मुस्लिम बहुमत साफ़ है।
एनसीपी गुट में वर्तमान में 20 सांसद हैं और उनकी मान्यता लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पास लंबित है। दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा पाने के लिए उन्हें मूल टीएमसी सांसदों की दो‑तिहाई, यानी कम से कम 19 सांसदों का समर्थन चाहिए।
सांसदों ने कहा कि वे न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द ही स्पष्टीकरण मिल जाएगा। उनका लक्ष्य blijft है कि मतदाताओं का भरोसा कायम रहे और वे अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करते रहें।
