कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकारी ख़ड़गे के खिलाफ पंजाब के संगरूर अदालत ने 15,000 रुपये का जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने उन्हें 19 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
यह वारंट उसी कटु मुद्दे पर आधारित है, जिस पर खड़गे ने कर्नाटक चुनाव के दौरान बजरंग दल की कथित तुलना लोगों के समक्ष रखी थी। उन्होंने बजरंग दल को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से समान किया और कहा कि कांग्रेसUSED होने पर उस दल पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
संगरूर निवासी और बजरंग दल से जुड़े हितेश भारद्वाज ने इस कथन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार खड़गे के बयान से धमकी और आतंक का माहौल बना, जिसे अदालत ने आपराधिक मामला माना।
कानूनी प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए संगरूर कोर्ट ने म裁䠰ौ के खिलाफ जमान tiuj 15,000 रुपये का वारंट जारी किया। अदालत ने यदि 19 सितंबर को खड़गे अदालत में पेश नहीं हुए तो गैर‑जमानत वारंट (NBW) जारी करने का भी प्रावधान रखा है।
मल्लिकुरी अर्न गे जमानती WARNT पंजाब के इस निर्णय से यह साफ दिखाई देता है कि राजनीति और अदालत दोनों यहाँ क़ानून के प्रति कट्टर हैं। भले ही खड़गे के भाषण पर आलोचना हुई हो, अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक उकसावा वायदा के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
कांग्रेस के भीतर भी इस घटना पर चर्चा खुलલે रही है। कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि खड़गे का व्यवहार पार्टी के लिए खतरनाक हो सकता है, जबकि दूसरे नेता इसे राजनीतिक मजबूती का कमीशन मानते हैं।
इस प्रकार, संगरूर अदालत का निर्णय मल्लिकुरी अर्न गे जमानती WARNT पंजाब के रूप में बस एक वाक् हुआ नहीं, बल्कि यह स्पष्ट कर रहा है कि किसी भी राजनैतिक वक्तव्य पर क़ानूनी जांच का गहन रुख अपनाया जाएगा।
अदालत की आखिरी तिथि और खड़गे का भुगतान कुछ दिन बाद स्पष्ट किया जायेगा। अब सभी की नज़रें 19 सितंबर की तारीख पर टिकी हुई हैं, जब खड़गे को अदालत का सामना करना पड़ेगा।
