केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कर दिया है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस्तीफा देना सबसे आसान रास्ता है लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं माना जाता.
नीट पेपर लीक विवाद के बीच विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रही है. हालांकि सरकार ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.
सूत्रों का कहना है कि प्रधान के साथ पूरी पार्टी खड़ी है और सरकार अपना कर्तव्य निभाते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार पर ध्यान देगी.
सरकारी स्तर पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की मौजूदा कमियों की पहचान की जा रही है. इन खामियों की एक विस्तृत सूची तैयार की जा रही है और उन्हें जल्द दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
पेपर लीक मामलों में शामिल कई गिरोहों का पहले ही भंडाफोड़ हो चुका है. जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं और आगे भी ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्ती बढ़ाई जाएगी.
सरकार का मुख्य फोकस इस्तीफे की राजनीति पर नहीं, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर है.
इस दिशा में आवश्यक सुधारों की समय सीमा तय की जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी तरह के लीक की संभावना को कम किया जा सके.
प्रधान ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी है कि वे पद पर रहकर 시스템 को मजबूत बनायें, न कि उसे छोड़ कर भाग जाएँ.
सरकार का मानना है कि सुधारात्मक कदम उठाने से ही जनता का विश्वास जीता जा सकता है, न कि केवल पद त्यागकर.
