आगरा में पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के घर पर विजिलेंस की छापेमारी के दौरान 13 किलो सोना और 1.62 करोड़ रुपये बरामद करने का सामना कर रहे एजेंसियों के बीच चौंकाने वाला मामला सामने आया है। छापेमारी के दौरान जांच टीम ने बेड, सोफा और दीवारों को खोलते हुए सामने आए अजीब संरचनाओं का सामना किया। जैसे ही बेड के भीतर जांच शुरू हुई, तो सोने के बंदे हुए हुए बॉक्स मिले। फिर सोफे के अंदर छिपे कई पैकेटों का सामना कर रहे थे। अंत में दीवारों के भीतर बने सीक्रेट लॉकर और विशेष कम्पार्टमेंट से सामान्य नजर से दिखाई नहीं देने वाले सामान बरामद हुए।
इस छापेमारी के बाद सभी प्रतिकूल स्वर कई सवालों के साथ हो गए हैं। एजेंसियों के अनुसार ललित कुमार के घर को सामान्य आवाज़ से सुनाई नहीं देने वाले गुप्त स्टोरेज के रूप में बदल दिया गया था। दीवारों की मोटाई और निर्माण में अंतर को देखते हुए जांच टीम ने उन्हें खंगालना शुरू किया। परतें हटाते हटाते सामने आए सीक्रेट कम्पार्टमेंटों से बड़ी मात्रा में सोना, नकदी और संवेदनशील दस्तावेज मिले।
आगरा में पूर्व ARTO के घर में करीब 13 किलोग्राम सोना बरामद करने का दावा किया गया है। मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार इसकी कीमत करोड़ों रुपये बैठती है। लेकिन जांच एजेंसियां केवल सोने की कीमत नहीं जोड़ रहीं। उनकी कोशिश यह पता लगाने की है कि यह सोना कब खरीदा गया? भुगतान किस खाते से हुआ? खरीद के दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं? क्या यह घोषित आय से मेल खाता है?
1.62 करोड़ रुपये नकद भी अलग-अलग कमरों, अलमारियों और गुप्त स्थानों से पैकेटों में बंद नोट मिलने का दावा किया गया है। अब हर पैकेट की लिस्टिंग की जा रही है। यदि पैकेटों पर किसी बैंक, तारीख या अन्य पहचान संबंधी निशान मिलते हैं तो वे जांच में अहम साक्ष्य बन सकते हैं।
छापेमारी के दौरान एक डिजिटल तिजोरी भी जांच के घेरे में आई। ललित कुमार ने उसका पासवर्ड याद न होने की बात कही, जिससे कार्रवाई कुछ समय के लिए रुक गई। बाद में तकनीकी विशेषज्ञ बुलाए गए और काफी मशक्कत के बाद तिजोरी खोली गई। उसके भीतर भी दस्तावेज और अन्य सामग्री मिलने की बात सामने आई है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, सामान्य नजर से इन स्थानों का पता लगाना लगभग असंभव था। विजिलेंस का मानना है कि जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नकदी नहीं बल्कि वित्तीय दस्तावेज हैं। तलाशी के दौरान मिले म्यूचुअल फंड निवेश, फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक निवेश, संपत्ति की रजिस्ट्रियां, वित्तीय रिकॉर्ड अब इन सभी का मिलान आयकर, बैंक खातों और अन्य एजेंसियों के रिकॉर्ड से किया जाएगा।
शुरुआती जांच में सामने आए एक अहम बात है कि ललित कुमार और उनके परिवार के नाम पर लखनऊ, आगरा और नोएडा में कई संपत्तियां हैं। इनमें जमीन, मकान और प्लॉट शामिल बताए जा रहे हैं। अब जांच एजेंसियां यह देख रही हैं कि इन संपत्तियों की खरीद के समय घोषित आय क्या थी और भुगतान किस माध्यम से किया गया।
इसी वजह से अब बिचौलियों, कथित सहयोगियों और विभाग से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। फॉरेंसिक और बैंक रिकॉर्ड बताएंगे पूरी कहानी। बरामद दस्तावेज अब फॉरेंसिक और वित्तीय जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। जांच एजेंसियां बैंक ट्रांजैक्शन, निवेश, संपत्ति खरीद और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करेंगी। इसी आधार पर आगे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई का दायरा तय होगा।
अब जांच का असली सवाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितना सोना और कितना कैश मिला। असल सवाल यह है कि कथित तौर पर यह संपत्ति वर्षों तक छिपी कैसे रही? क्या घर को पहले से ही गुप्त लॉकरों के हिसाब से तैयार कराया गया था? क्या इसमें और लोग भी शामिल थे? और क्या यह सिर्फ एक अधिकारी की कहानी है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? इन सवालों के जवाब अब विजिलेंस की वित्तीय और फॉरेंसिक जांच से सामने आएंगे।
