ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे में दुनिया भर से प्रतिनिधिमंडल पहुँचे. लेकिन तीन प्रमुख मुस्लिम देशों ने अपने प्रतिनिधि वहाँ नहीं भेजे. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और कुवैत ने इस अंतिम विदाई समारोह का बहिष्कार किया. यह अनुपस्थिति मुस्लिम दुनिया में बढ़ती दरार को दर्शाती है.
ये तीनों देश खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य हैं और सुन्नी बहुल राष्ट्र हैं. वे ईरान के शिया बहुल क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. उनके संबंध लंबे समय से जटिल रहे हैं. हाल के वर्षों में, ईरान ने जीसीसी के कई सदस्यों पर ड्रोन हमले किए हैं. इन हमलों ने सुरक्षा चिंताएँ बढ़ाई हैं.
यूएई, बहरीन और कुवैत ने जनाजे से दूरी बनाई. उन्होंने इसे केवल एक प्रोटोकॉल संबंधी फैसला नहीं बताया. ये देश ईरान के हालिया हमलों के खिलाफ अपना विरोध जताना चाहते थे. ईरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और कुवैत पर ड्रोन से हमले किए. इन हमलों ने क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है.
इन तीनों देशों की विदेश नीतियाँ बदल रही हैं. यूएई अब “सुरक्षा पहले” की नीति अपना रहा है. उसका कहना है कि ईरान एक क्षेत्रीय खतरा है. यूएई ने इज़राइल और अमेरिका के साथ सैन्य-आर्थिक गठबंधन मजबूत किया है. बहरीन लंबे समय से ईरान के हस्तक्षेप को लेकर चिंतित रहा है. अमेरिका के साथ उसका नौसैनिक आधार उसे अमेरिका के करीब लाता है. कुवैत ने हमेशा एक सावधानीपूर्ण दूरी बनाए रखी है.
अमेरिका का इन देशों पर दबाब भी एक कारण बताया गया है. तस्नीम न्यूज़ एजेंसी का दावा है कि अमेरिका ने अरब देशों पर दबाव डाला. यूएई, बहरीन और कुवैत ने इसे खारिज नहीं किया, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
दूसरी ओर, सऊदी अरब, कतर और ओमान ने जनाजे में आधिकारिक प्रतिनिधि भेजे. सऊदी ने उपविदेश मंत्री वलीद अल खुरैजी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा. यह एक सुन्नी प्रमुख द्वारा शिया नेता को सम्मान देने के रूप में देखा गया. सऊदी का यह कदम ईरान के साथ तनाव कम करने की इच्छा दर्शाता है. कतर और ओमान का भी यही रुख है.
यह घटना दिखाती है कि खाड़ी की राजनीति अब धार्मिक एकता से अधिक राष्ट्रीय हितों पर आधारित है. सऊदी अरब ने संतुलन बनाने की कोशिश की, जबकि यूएई, बहरीन और कुवैत ने ईरान के खिलाफ रुख बरकरार रखा. यह दरार “मजहब” (धर्म) से बढ़कर “राष्ट्रीय हित” की ओर इशारा करती है.
अमेरिका और इज़राइल के साथ नए गठजोड़ के साथ, राजनीतिक दबावों ने मुस्लिम दुनिया में पारंपरिक एकता को कमजोर किया है. आखिरी क्षणों में तीन प्रमुख अरब राष्ट्रों के अनुपस्थित होने से खाड़ी के विभाजन की वास्तविकता साफ होती है.
यह खबर मध्य पूर्व और खाड़ी सुरक्षा में बदलाव की ओर इशारा करती है. क्षेत्र के भविष्य में इस दरार का असर दिखाई देगा.
