अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के आरोप पर पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक प्राथमिक विद्यालय का शिक्षक, एक पूर्व कार मैकेनिक, एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी, ट्रस्ट के पासे के कर्मचारी और आउटसोर्सिंग एजेंसी के कुछ कंत्राटी शामिल हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने सभी आरोपी के ठिकानों से 20 लाख रुपये से अधिक नकद, विदेशी मुद्रा और आभूषण बरामद किए। सबसे बड़ी बरामदगी शिक्षक अविनाश शुक्ला के ठिकाने से हुई, जहां से एक बड़ी मात्रा में नकदी मिली।
गबन का मुख्य अड्डा दान गिनती के दौरान हुआ मान रहा है। आरोपी के अनुसार, दानपात्रों से निकलने वाली राशि को गिनते समय उन्हें बंद रखकर नकदी निकाल कर निजी उपयोग के लिए रखी गई। पुलिस ने कहा, “कैश रिकंसिलिएशन” के दौरान अपघात नहीं बल्कि दुरुपयोग हुआ।
अनुकल्प मिश्रा, जो आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए दान गिनने के काम पर लगाया गया, ने अपने मासिक वेतन से लगभग 65 लाख रुपये का घर, फार्महाउस, मोटरसायकल और एसयूवी ली। उसकी ठिकाने से भी 16.80 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जिसे पुलिस जाँच कर रही है।
साथ ही, पूर्व कार मैकेनिक बने लवकुश मिश्रा से लगभग 14.25 लाख रुपये नकदी मिली। रामशंकर मिश्रा और करुणेश पांडेय पर भी दान में गड़_RCCENTRYर्धापी के आरोप हैं, जिनकी ठिकाने से क्रमशः 7.30 लाख और 18 लाख रुपये नकदी बरामद हुआ।
अयोध्या जेल में करीब पाँच घंटे तक पूछताछ के बाद पुलिस टीम ने सभी आरोपी से विस्तृत सवाल-जवाब लिये। पूछताछ के दौरान उन्हें दान गिनती के अंदर अनधिकृत पहुँच, चाबी के पास और व्हाट्सएप चैट के बारे में सवाल पूछे गए।
ट्रस्ट के पासे के कर्मचारी रामशंकर यादव, जिसे “टिन्नू” कहा जाता है, को भी साजिश का मुख्य चरित्र माना गया। वे पहले ट्रस्ट के महासचिव के निजी ड्राइवर थे और मंदिर प्रशासन में भी संलग्न थे। पुलिस ने उनकी व्हाट्सएप चैट और वित्तीय लेनदेन की जाँच जारी रखी है।
रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव पर भी आरोप है कि उन्होंने दान गिनती में अनियमितताएँ रोकने में विफल रहे और गबन में भूमिका निभाई। सभी आरोपी के बैंक खाते, संपत्तियाँ और लेनदेन पर गहन जाँच चल रही है।
पुलिस ने कहा, “जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, हम सबूतों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे।” अब तक के सबूत दिखाते हैं कि चढ़ावे की रकम से कई व्यक्तियों ने हज़ारों रुपये का निजी उपयोग किया है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अभी भी सुलझाने के लिए सक्रिय रूप से-count की जा रही है।
