मद्रास हाईकोर्ट में आज विजय की फिल्म ‘जन नायक’ के सर्टिफिकेशन विवाद पर सुनवाई हुई। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने सिंगल जज के उस आदेश को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी है, जिसमें उन्हें फिल्म को तुरंत U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश मनिंद्रा मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
CBFC के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नारायणन ने प्रस्तुत किया कि सिंगल जज ने बिना उनका पक्ष सुने आदेश पारित कर दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि फिल्म देखने के बाद बोर्ड के एक सदस्य ने कुछ दृश्यों पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद निर्माताओं ने खुद ही कट लगा दिए थे। उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला स्पेशल था, जहाँ आपत्तियां पहले से दर्ज थीं।
CBFC की ओर से यह भी बताया गया कि 31 दिसंबर को अमेज़न की तरफ से निर्माताओं को सूचित किया गया था कि रिलीज़ डेट को लेकर स्पष्टता नहीं होने पर वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। निर्माताओं का कहना है कि उन्होंने बड़ी रकम लगाई है और जल्द सर्टिफिकेट चाहते हैं। हालांकि, CBFC ने अपने बचाव में कहा कि सिंगल जज ने बिना कारण बताए फैसला सुनाया।
प्रोड्यूसर की ओर से वकील परासरन ने कोर्ट को बताया कि विवादित दृश्य पहले ही हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड सदस्य की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए कट लगा दिए गए थे। ऐसे में फिर से समिति के सामने फिल्म जमा करना और उन्हीं दृश्यों को हटाना महज एक खाली कवायद होगी। उन्होंने दलील दी कि यह एक अजीब स्थिति है जहाँ निर्माताओं से वही काम दोहराने को कहा जा रहा है जो वे पहले ही कर चुके हैं।
मामला अदालत के सामने लटका हुआ है। अमेज़न और निर्माताओं के बीच रिलीज की तारीख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि हाईकोर्ट इसकी सुनवाई 20 जनवरी को करेगा। अब देखना होगा कि डिवीजन बेंच CBFC के तर्कों से सहमत होती है या निर्माताओं को राहत मिलती है।
